पूजा में घंटी बजाने का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व जानें। घंटी की ध्वनि कैसे बढ़ाती है पूजा की एकाग्रता और नकारात्मक ऊर्जा को करती है दूर, साथ ही इसके नियम और साउंड हीलिंग में उपयोग।
पूजा करते समय घंटी बजाना एक महत्वपूर्ण धार्मिक परंपरा है, जिसका गहरा आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व है। मान्यता है कि घंटी की मधुर ध्वनि देवताओं को प्रसन्न करती है और नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर सकारात्मक वातावरण बनाती है। इससे पूजा स्थल पर मन की शांति और एकाग्रता बढ़ती है, जिससे भक्ति की अनुभूति और भी प्रगाढ़ हो जाती है।
घंटी की ध्वनि से मिलता है पुण्य – स्कंद पुराण का संदर्भ
स्कंद पुराण के अनुसार, घंटी की ध्वनि ‘ॐ’ के समान होती है। यह शुभ ध्वनि न केवल वातावरण को पवित्र बनाती है बल्कि मन और शरीर को भी शांति प्रदान करती है। ऐसा माना जाता है कि मंदिर में घंटी बजाने से ‘ॐ’ के जाप के बराबर पुण्य प्राप्त होता है। प्राचीन काल में सृष्टि के सृजन के समय जो नाद उत्पन्न हुआ था, उसकी तुलना घंटी की आवाज से की जाती है।
पूजा में घंटी बजाने के नियम
मंदिर में प्रवेश करते ही घंटी बजाना शुभ माना जाता है। यह भगवान के प्रति अपनी हाजिरी लगाने का संकेत होता है और उनका ध्यान आकर्षित करता है। पूजा के दौरान भी घंटी बजानी चाहिए, लेकिन रात के समय शयन आरती के बाद घंटी बजाना वर्जित होता है।
साउंड हीलिंग में घंटी की भूमिका
घंटी की ध्वनि एक विशिष्ट आवृत्ति उत्पन्न करती है जो मस्तिष्क को मानसिक शांति प्रदान करती है। इसी कारण साउंड हीलिंग (ध्वनि चिकित्सा) में भी घंटी का उपयोग किया जाता है। विभिन्न आकार और आकार की घंटियां अलग-अलग प्रकार की तरंगें उत्पन्न करती हैं जो तनाव कम करने में सहायक होती हैं। इसके अलावा, घंटी को शुभता, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।


