Haryana Public Service Commission (एचपीएससी) ने चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर फैलाए जा रहे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि आयोग के खिलाफ प्रसारित की जा रही टिप्पणियां पूरी तरह से निराधार, तथ्यहीन और भ्रामक हैं। आयोग ने कहा है कि विशेष रूप से माननीय अध्यक्ष की शैक्षणिक योग्यता से संबंधित जो बातें सोशल मीडिया और कुछ अन्य माध्यमों पर फैलायी जा रही हैं, उनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है।
हरियाणा लोक सेवा आयोग की ओर से जारी स्पष्टीकरण में कहा गया है कि आयोग द्वारा अब तक कराई गई सभी भर्तियां पूरी तरह से संविधान, नियमों और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुरूप संपन्न हुई हैं। आयोग ने दोहराया कि उसकी सभी चयन प्रक्रियाएं पूरी तरह मेरिट आधारित, निष्पक्ष और पारदर्शी रही हैं तथा वे न्यायिक जांच और समीक्षा की कसौटी पर भी पूरी तरह खरी उतरी हैं।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि चयन प्रक्रिया के प्रत्येक चरण में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आधुनिक तकनीकों, स्पष्ट दिशा-निर्देशों और निष्पक्ष मूल्यांकन प्रणाली का पालन किया जाता है। लिखित परीक्षाओं से लेकर साक्षात्कार और अंतिम चयन सूची तक, सभी चरणों में उम्मीदवारों को समान अवसर प्रदान किया जाता है और किसी भी प्रकार के पक्षपात या अनुचित हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं रहती।
एचपीएससी ने कहा कि आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जिसकी विश्वसनीयता और निष्पक्षता उसकी सबसे बड़ी पूंजी है। आयोग के अधिकारियों और सदस्यों द्वारा अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ किया जाता है। इस प्रकार की अफवाहें फैलाकर न केवल आयोग की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है, बल्कि मेहनत से चयनित अभ्यर्थियों के मन में भी अनावश्यक संदेह उत्पन्न किया जा रहा है।
आयोग ने यह भी बताया कि विगत वर्षों में आयोजित भर्तियों से संबंधित मामलों में न्यायालयों द्वारा भी चयन प्रक्रियाओं को सही और नियमों के अनुरूप माना गया है। यह इस बात का प्रमाण है कि एचपीएससी की कार्यप्रणाली पूरी तरह कानूनी और पारदर्शी है।
हरियाणा लोक सेवा आयोग ने आम जनता और अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की भ्रामक या अपुष्ट जानकारी पर विश्वास न करें। आयोग से संबंधित किसी भी सूचना के लिए केवल आधिकारिक विज्ञप्तियों और अधिकृत माध्यमों पर ही भरोसा किया जाए। आयोग ने भरोसा दिलाया कि वह भविष्य में भी निष्पक्ष, पारदर्शी और योग्यता आधारित चयन प्रक्रिया को पूरी प्रतिबद्धता के साथ जारी रखेगा।
आयोग ने अंत में कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संस्थाओं की साख बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है और बिना तथ्यों के आरोप लगाना न केवल गलत है, बल्कि संस्थागत विश्वास को भी नुकसान पहुंचाता है।


