देश की आज़ादी और सुरक्षा के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने वाले महान स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों, भूतपूर्व सैनिकों तथा विशेष रूप से वीर नारियों को सम्मानित करने का गौरवपूर्ण अवसर प्राप्त हुआ। यह सम्मान समारोह राष्ट्र की ओर से उन परिवारों और वीरों के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक रहा, जिनके त्याग, धैर्य और अद्वितीय समर्पण के कारण आज देश स्वतंत्र, सुरक्षित और सशक्त है।
कार्यक्रम के दौरान स्वतंत्रता संग्राम में योगदान देने वाले सेनानियों के परिजनों को शाल, स्मृति-चिह्न और सम्मान-पत्र प्रदान कर उनका अभिनंदन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों का बलिदान केवल इतिहास का हिस्सा नहीं है, बल्कि वह हमारे वर्तमान और भविष्य की नींव है। उनके आदर्श आज भी देशवासियों को राष्ट्रप्रेम, साहस और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा देते हैं।
भूतपूर्व सैनिकों को सम्मानित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि उन्होंने देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए कठिन परिस्थितियों में भी अपना कर्तव्य निभाया। चाहे युद्धकाल हो या शांति का समय, भारतीय सैनिकों का अनुशासन, समर्पण और देशभक्ति सदैव प्रेरणास्रोत रही है। भूतपूर्व सैनिकों के योगदान के कारण ही देश आज सुरक्षित और आत्मविश्वास से भरा हुआ है।
कार्यक्रम में वीर नारियों का विशेष सम्मान किया गया। वक्ताओं ने कहा कि वीर नारियां केवल शहीद सैनिकों की पत्नियां नहीं हैं, बल्कि वे साहस, धैर्य और त्याग की जीवंत मिसाल हैं। कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने परिवार और समाज को संभालते हुए राष्ट्र के प्रति अपनी आस्था को कमजोर नहीं होने दिया। उनका जीवन संघर्ष, संकल्प और आत्मबल का प्रतीक है, जिससे समाज को नई दिशा मिलती है।
सम्मान समारोह के दौरान उपस्थित अतिथियों ने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को देश के गौरवशाली इतिहास से जोड़ने का कार्य करते हैं। जब युवा स्वतंत्रता सेनानियों, सैनिकों और वीर नारियों के जीवन से परिचित होते हैं, तो उनमें भी देश के प्रति कर्तव्यबोध और सेवा भावना का विकास होता है। यह सम्मान केवल व्यक्तियों का नहीं, बल्कि उन मूल्यों का है जिन पर भारत की आत्मा टिकी हुई है।
वक्ताओं ने यह भी कहा कि राष्ट्र की प्रगति तभी संभव है जब हम अपने नायकों और उनके परिवारों के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता बनाए रखें। सरकार और समाज दोनों का दायित्व है कि स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों, भूतपूर्व सैनिकों और वीर नारियों के कल्याण के लिए निरंतर कार्य किया जाए।
कार्यक्रम के समापन पर यह संकल्प लिया गया कि देश के लिए बलिदान देने वालों की स्मृति और उनके आदर्शों को सदैव जीवित रखा जाएगा। यह सम्मान समारोह न केवल कृतज्ञता का भाव व्यक्त करता है, बल्कि राष्ट्रसेवा, एकता और समर्पण के मूल्यों को सुदृढ़ करने का सशक्त माध्यम भी बना।


