जिले के कुलेरी गांव में एक आत्मीय और सादगी भरे माहौल में ग्रामीणों के साथ समय बिताते हुए उनके सुख-दुख और स्थानीय मुद्दों पर चर्चा की गई। गांव में परिवारजनों के बीच बैठकर अलाव सेकते हुए उनका हाल-चाल पूछा गया और उनकी रोजमर्रा की समस्याओं तथा जरूरतों की जानकारी ली गई। इस दौरान ग्रामीणों ने खुले मन से अपनी बातें रखीं और क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विषयों पर संवाद हुआ।
इस अनौपचारिक मुलाकात के दौरान गांव की गलियों, खेतों और चौपाल की चर्चा हुई। ग्रामीणों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को साझा किया। साथ ही किसानों, महिलाओं और युवाओं से जुड़े विषयों पर भी बातचीत हुई। ग्रामीणों का कहना था कि इस प्रकार की सीधी बातचीत से उन्हें अपनी बात रखने का अवसर मिलता है और प्रशासन तक उनकी आवाज पहुंचती है।
अलाव के पास बैठकर की गई यह चर्चा केवल औपचारिक नहीं थी, बल्कि इसमें अपनापन और पारिवारिक माहौल झलक रहा था। गांव के बुजुर्गों ने अपने अनुभव साझा किए, वहीं युवाओं ने रोजगार और शिक्षा से जुड़े सुझाव रखे। महिलाओं ने स्वास्थ्य सेवाओं और स्वयं सहायता समूहों से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की। सभी ने मिलकर गांव के विकास और सामाजिक सौहार्द पर अपने विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर कहा गया कि गांवों की असली तस्वीर जानने के लिए जमीन से जुड़कर लोगों से संवाद करना जरूरी है। इस तरह की आत्मीय भेंट से न केवल जनप्रतिनिधि को जमीनी हकीकत का पता चलता है, बल्कि ग्रामीणों में भी विश्वास और अपनत्व की भावना मजबूत होती है। ग्रामीणों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि जब जनप्रतिनिधि सीधे गांव में आकर उनके बीच बैठते हैं, तो समस्याओं के समाधान की उम्मीद और मजबूत होती है।
इस दौरान गांव के सामाजिक जीवन, आपसी भाईचारे और पारंपरिक मूल्यों की भी चर्चा हुई। कुलेरी गांव के लोगों ने बताया कि वे मिलजुलकर समस्याओं का समाधान करने में विश्वास रखते हैं और विकास कार्यों में सहयोग के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि गांव की जरूरतों और सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
इस आत्मीय भेंट के बाद कहा गया कि गांववासियों से मिले स्नेह और अपनत्व से मन अभिभूत है। ऐसे पल सार्वजनिक जीवन में नई ऊर्जा और प्रेरणा देते हैं। ग्रामीणों के बीच बैठकर उनके अनुभवों को सुनना और उनकी भावनाओं को समझना अपने आप में एक विशेष अनुभव है।
अंत में ग्रामीणों ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह के संवाद से जनप्रतिनिधि और जनता के बीच दूरी कम होती है और विश्वास का रिश्ता मजबूत होता है। कुलेरी गांव में हुआ यह संवाद स्थानीय लोकतंत्र और जनसंपर्क की सशक्त मिसाल बनकर सामने आया।


