बदलती जीवनशैली, बढ़ता तनाव और असंतुलित खानपान के कारण हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) आज देश की सबसे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में से एक बन चुका है। पहले जहां यह बीमारी अधिकतर बुजुर्गों तक सीमित मानी जाती थी, वहीं अब युवा वर्ग भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहा है। चिकित्सकों के अनुसार, समय रहते इस बीमारी पर ध्यान न दिया जाए तो यह हृदय रोग, स्ट्रोक और किडनी फेलियर जैसी जानलेवा समस्याओं का कारण बन सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि हाई ब्लड प्रेशर को “साइलेंट किलर” भी कहा जाता है, क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण अक्सर दिखाई नहीं देते। कई लोग वर्षों तक इस बीमारी से ग्रस्त रहते हैं और उन्हें इसका पता तब चलता है, जब कोई गंभीर जटिलता सामने आती है। सामान्य तौर पर सिरदर्द, चक्कर आना, सीने में दर्द, थकान और धुंधला दिखाई देना इसके कुछ संकेत हो सकते हैं, लेकिन ये लक्षण हर मरीज में नजर आएं, यह जरूरी नहीं है।
हाई ब्लड प्रेशर के प्रमुख कारणों में अत्यधिक नमक का सेवन, मोटापा, शारीरिक गतिविधि की कमी, धूम्रपान, शराब का अधिक सेवन और मानसिक तनाव शामिल हैं। इसके अलावा, आनुवंशिक कारणों से भी कुछ लोगों में यह समस्या देखी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक जीवनशैली में घंटों तक मोबाइल और कंप्यूटर पर काम करना, नींद की कमी और जंक फूड का बढ़ता चलन भी इस बीमारी को बढ़ावा दे रहा है।
डॉक्टरों का मानना है कि हाई ब्लड प्रेशर से बचाव और नियंत्रण दोनों संभव हैं, बशर्ते समय रहते सही कदम उठाए जाएं। नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच कराना, संतुलित और पौष्टिक आहार लेना तथा रोजाना कम से कम 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि अपनाना बेहद जरूरी है। नमक और वसा युक्त भोजन को सीमित करना, हरी सब्जियां, फल और साबुत अनाज को आहार में शामिल करना लाभकारी साबित होता है।
मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। योग, ध्यान और प्राणायाम जैसी गतिविधियां तनाव को कम करने में सहायक होती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि धूम्रपान और शराब से दूरी बनाकर रखी जाए, क्योंकि ये दोनों ही उच्च रक्तचाप को बढ़ाने वाले प्रमुख कारक हैं।
यदि किसी व्यक्ति का ब्लड प्रेशर लगातार अधिक रहता है, तो चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार दवाइयों का सेवन आवश्यक हो जाता है। हालांकि, दवाइयों के साथ-साथ जीवनशैली में सुधार भी जरूरी है, ताकि लंबे समय तक स्वस्थ रहा जा सके। डॉक्टरों की सलाह के बिना दवाइयों को बंद करना या बदलना खतरनाक हो सकता है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा भी लोगों को हाई ब्लड प्रेशर के प्रति जागरूक करने के लिए विभिन्न अभियान चलाए जा रहे हैं। इन अभियानों का उद्देश्य लोगों को नियमित जांच, स्वस्थ जीवनशैली और समय पर इलाज के महत्व के बारे में जानकारी देना है।
निष्कर्षतः, हाई ब्लड प्रेशर एक गंभीर लेकिन नियंत्रित की जा सकने वाली बीमारी है। जागरूकता, नियमित जांच और स्वस्थ आदतों को अपनाकर न केवल इस बीमारी से बचा जा सकता है, बल्कि एक लंबा और स्वस्थ जीवन भी जिया जा सकता है।


