हरियाणा में रवि और ब्यास जल न्यायाधिकरण के गठन का स्वागत किया गया है और इसे राज्य के जल प्रबंधन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। राज्य सरकार और संबंधित विभागों ने इसे सहकारी संघवाद की भावना को मजबूत करने वाला निर्णय बताया है, जिससे भविष्य में जल बंटवारे से जुड़े विवादों का समाधान पारदर्शी और न्यायसंगत तरीके से हो सकेगा। इस मौके पर सिंचाई और जल संसाधन प्रबंधन को लेकर रचनात्मक और सकारात्मक चर्चाएं भी हुईं, जिनका उद्देश्य राज्य में जल उपयोग को अधिक प्रभावी, संतुलित और टिकाऊ बनाना है।
बैठक में अधिकारियों और विशेषज्ञों ने कहा कि हरियाणा जैसे कृषि प्रधान राज्य के लिए जल संसाधनों का सही प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था में खेती की अहम भूमिका है और इसके लिए सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था होना जरूरी है। रवि और ब्यास नदियों से जुड़े जल बंटवारे के मुद्दे लंबे समय से विभिन्न राज्यों के बीच चर्चा और विवाद का विषय रहे हैं। ऐसे में जल न्यायाधिकरण के जरिए एक स्पष्ट और कानूनी ढांचा तैयार होने से सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा और निर्णय भी तथ्यों व आंकड़ों के आधार पर लिया जा सकेगा।
राज्य सरकार के प्रतिनिधियों ने कहा कि सहकारी संघवाद की भावना के तहत केंद्र और राज्य मिलकर काम करेंगे, ताकि जल संसाधनों का न्यायपूर्ण वितरण हो और किसी भी राज्य के हितों की अनदेखी न हो। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हरियाणा की प्राथमिकता केवल अपने हिस्से का पानी हासिल करना ही नहीं, बल्कि उपलब्ध जल का विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करना भी है। इसके लिए आधुनिक सिंचाई तकनीकों, जल संरक्षण योजनाओं और पुनर्चक्रण प्रणालियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा।
चर्चा के दौरान यह भी कहा गया कि आने वाले वर्षों में जल संकट की चुनौती और गंभीर हो सकती है, इसलिए अभी से दीर्घकालिक रणनीति बनाना जरूरी है। नहरों के आधुनिकीकरण, ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी माइक्रो इरिगेशन प्रणालियों के विस्तार और किसानों को जल बचत के प्रति जागरूक करने जैसे कदमों पर सहमति बनी। अधिकारियों का मानना है कि इन उपायों से न केवल पानी की बचत होगी, बल्कि फसलों की उत्पादकता भी बढ़ेगी।
विशेषज्ञों ने यह भी सुझाव दिया कि नदी बेसिन स्तर पर योजना बनाकर काम किया जाना चाहिए, ताकि जल संसाधनों का समग्र और वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन हो सके। इससे बाढ़ और सूखे जैसी समस्याओं से निपटने में भी मदद मिलेगी। बैठक में यह भरोसा दिलाया गया कि जल न्यायाधिकरण के फैसलों का सम्मान करते हुए सभी संबंधित पक्ष मिलकर समाधान की दिशा में आगे बढ़ेंगे।
कुल मिलाकर, हरियाणा में रवि और ब्यास जल न्यायाधिकरण के स्वागत और सिंचाई व जल संसाधनों पर हुई रचनात्मक चर्चा को राज्य के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। यह पहल न केवल अंतरराज्यीय सहयोग को मजबूत करेगी, बल्कि भविष्य में टिकाऊ जल प्रबंधन की दिशा में भी एक मजबूत आधार तैयार करेगी। सरकार का कहना है कि किसानों, आम नागरिकों और उद्योगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जल नीति को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा, ताकि राज्य का विकास संतुलित और दीर्घकालिक रूप से सुनिश्चित हो सके।


