हरियाणा सरकार विश्वविद्यालयों के संविदा और पार्ट-टाइम शिक्षकों को 60 वर्ष तक सेवा सुरक्षा देने पर विचार कर रही है, समिति गठित कर विभिन्न विभागों से सुझाव मांगे गए।
हरियाणा सरकार राज्य विश्वविद्यालयों में कार्यरत संविदात्मक और अंशकालिक शिक्षकों को सेवा सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। शिक्षा मंत्री श्री महीपाल ढांडा ने विधानसभा सत्र के दौरान बताया कि सरकार “सेवा सुरक्षा विधेयक” का प्रारूप तैयार करने पर गंभीरता से विचार कर रही है।
शिक्षकों के संगठनों की मांग पर कार्रवाई
शिक्षा मंत्री ने बताया कि हरियाणा यूनिवर्सिटीज कॉन्ट्रैक्चुअल टीचर्स एसोसिएशन (HUCTA) और हरियाणा यूनिवर्सिटीज पार्ट-टाइम टीचर्स एसोसिएशन (HUPTTA) द्वारा वर्ष 2024 के सेवा सुरक्षा अध्यादेश की तर्ज पर कानून बनाने की मांग की गई थी। प्रस्ताव में शिक्षकों को 60 वर्ष की आयु तक सेवा सुरक्षा देने की बात कही गई है।
मुख्यमंत्री की स्वीकृति से समिति गठित
सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री की स्वीकृति से एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया। इस समिति में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक के कुलपति को अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि रजिस्ट्रार (एमडीयू), गुरुग्राम विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के डीन अकादमिक अफेयर्स को सदस्य नामित किया गया है।
समिति को संविदा व अंशकालिक शिक्षकों की सेवा सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का दायित्व सौंपा गया था।
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डेटा संग्रह और विभागीय परामर्श की प्रक्रिया
रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद 29 जुलाई 2025 को मुख्यमंत्री के ओएसडी की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें निर्णय लिया गया कि राज्य विश्वविद्यालयों के समस्त शैक्षणिक स्टाफ का विस्तृत डाटा निर्धारित प्रारूप में एकत्र किया जाए।
30 जुलाई 2025 को उच्चतर शिक्षा निदेशालय ने सभी विश्वविद्यालयों को पत्र जारी कर आवश्यक जानकारी मांगी। प्राप्त आंकड़ों को संकलित कर पूरी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को भेजी गई।
अन्य विभागों से मांगे गए सुझाव
मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार 9 दिसंबर 2025 को चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग, आयुष विभाग, युवा सशक्तिकरण एवं उद्यमिता विभाग, पशुपालन एवं डेयरी विभाग, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग और खेल विभाग से सुझाव व टिप्पणियां मांगी गईं, ताकि समग्र नीति तैयार की जा सके।
हालांकि तय समय में सभी विभागों से जवाब नहीं मिल पाया, जिसके चलते 29 जनवरी 2026 को रिमाइंडर जारी किया गया। शिक्षा मंत्री ने बताया कि जैसे ही सभी विभागों से आवश्यक सूचनाएं प्राप्त होंगी, मामला पुनः मुख्यमंत्री के समक्ष अंतिम निर्णय के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।
सरकार का कहना है कि यह पहल विश्वविद्यालयों में कार्यरत संविदा और अंशकालिक शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

