हरियाणा में MRRR योजना के तहत 40 करोड़ से अधिक राजस्व अभिलेख डिजिटल हुए, रजिस्ट्रियों, इंतकाल मामलों और किसान रजिस्ट्री में रिकॉर्ड प्रगति दर्ज।
हरियाणा सरकार ने पारदर्शी, तेज और तकनीक-आधारित भूमि प्रशासन की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए राज्यभर में 40 करोड़ से अधिक राजस्व अभिलेखों का सफलतापूर्वक डिजिटलीकरण कर लिया है। मॉडर्न रेवेन्यू रिकॉर्ड रूम्स (MRRR) पहल के तहत अब तक 40 करोड़ 09 लाख से अधिक दस्तावेजों की स्कैन की गई छवियाँ ऑनलाइन अपलोड की जा चुकी हैं, जिससे यह अभियान राज्य के प्रशासनिक इतिहास के सबसे बड़े डिजिटल सुधारों में शामिल हो गया है।
इस उपलब्धि की समीक्षा वित्त आयुक्त (राजस्व एवं आपदा प्रबंधन) डॉ. सुमिता मिश्रा ने सभी उपायुक्तों के साथ आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में की। उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल ऐतिहासिक भूमि अभिलेखों के संरक्षण को सुनिश्चित करेगी, बल्कि डेटा सुरक्षा बढ़ाने और आम नागरिकों को प्रमाणित दस्तावेजों की आसान उपलब्धता देने में भी अहम भूमिका निभाएगी। साथ ही, उन्होंने सभी जिलों को गुणवत्ता मानकों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए।
बैठक में बताया गया कि 16 फरवरी 2026 तक लगभग 95 प्रतिशत रजिस्ट्रियाँ निर्धारित पांच दिनों की समय-सीमा के भीतर पूरी कर ली गई हैं। इससे स्पष्ट है कि भूमि से जुड़े लेन-देन और पंजीकरण प्रक्रियाओं में अब तेजी और पारदर्शिता आई है। शेष मामलों को भी समयबद्ध ढंग से निपटाने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं।
राज्य के 7,104 गांवों और 143 तहसीलों में लंबित इंतकाल मामलों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को वेब-हैलरिस (Web-HALRIS) पोर्टल पर प्रविष्टियाँ शीघ्र दर्ज करने और तय समय सीमा से अधिक लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने के निर्देश दिए गए। जानकारी के अनुसार, पिछले एक महीने में ही 51,199 लंबित इंतकाल मामलों का निपटारा किया जा चुका है। डॉ. सुमिता मिश्रा ने लक्ष्य तय करते हुए कहा कि अगले एक महीने में सभी लंबित मामलों का समाधान किया जाए और इसके लिए हर शनिवार ‘जलसा-ए-आम’ अभियान जारी रखा जाए।
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भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत 64.34 लाख प्राप्त ततिमों में से 60.79 लाख का कार्य पूरा किया जा चुका है। इसके अलावा 4,115 गांवों में भू-नक्शों का अद्यतन भी किया जा चुका है। जिन जिलों में कार्य की गति अपेक्षाकृत धीमी है, वहां प्रशासन को समयबद्ध तरीके से प्रगति तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। सभी उपायुक्तों को 28 फरवरी 2026 तक ततिमा अद्यतन कार्य पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है।
कृषि क्षेत्र को डिजिटल रूप से मजबूत करने के लिए एग्रीस्टैक (हरियाणा किसान रजिस्ट्री) पहल के तहत अब तक 10.76 लाख से अधिक किसानों का पंजीकरण किया जा चुका है, जिनमें से 6.37 लाख से अधिक मामलों में स्वीकृति भी मिल चुकी है। वहीं डिजिटल क्रॉप सर्वे परियोजना को 3,312 गांवों में लागू किया जा रहा है, जिसमें लगभग 68 लाख खेतों को शामिल किया गया है। यह पहल हरियाणा में डेटा-आधारित कृषि शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
इसके साथ ही बैठक में हरियाणा भूमि राजस्व अधिनियम की धारा 111ए के तहत संयुक्त जोतों के अनिवार्य बंटवारे, स्वामित्व प्रविष्टियों के संशोधन, सरकारी भूमि की एकरूप नामावली और इंतकाल व फर्द-बदर रिकॉर्ड के पूर्ण डिजिटलीकरण पर भी विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सभी प्रक्रियाओं का पालन पूरी सख्ती और पारदर्शिता के साथ किया जाए, ताकि आम जनता को तेज, भरोसेमंद और भ्रष्टाचार-मुक्त सेवाएं मिल सकें।


