अंबाला प्रॉपर्टी आईडी मामले में हरियाणा राइट टू सर्विस कमीशन ने लापरवाही पर अधिकारियों को नोटिस जारी कर 5,000 रुपये मुआवजा देने के निर्देश दिए।
अंबाला की निवासी श्रीमती सुरजीत कौर के नए प्रॉपर्टी आईडी जारी करने से जुड़े मामले में हरियाणा राइट टू सर्विस कमीशन ने सख्त रुख अपनाते हुए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने प्रशासनिक प्रक्रिया की समीक्षा करते हुए पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
मामले में यह सामने आया कि शिकायतकर्ता की अपीलें प्रथम अपीलीय प्राधिकारी (एफजीआरए) स्तर पर निरस्त कर दी गई थीं। हालांकि, आयोग द्वारा 09 फरवरी 2026 को पारित अंतरिम आदेश के बाद संबंधित संपत्ति को अधिकृत श्रेणी में दर्ज किया गया।
इससे पहले 04 फरवरी 2026 को नगर निगम अंबाला द्वारा प्रस्तुत उत्तर में उक्त प्लॉट को अधिकृत नहीं बताया गया था। आयोग द्वारा विस्तृत तथ्य मांगे जाने के बाद स्पष्ट हुआ कि संपत्ति गांव की सीमा और अधिकृत क्षेत्र की सीमा पर स्थित है।
आयोग ने हरियाणा सेवा का अधिकार अधिनियम, 2014 के तहत एफजीआरए एवं एसजीआरए को अपीलों के निस्तारण के लिए निर्धारित 30 कार्य दिवस की समयसीमा की भी याद दिलाई। आयोग ने सुझाव दिया कि शिकायतों का समाधान प्रारंभिक स्तर पर ही सुनिश्चित किया जाए, ताकि नागरिकों को उच्च स्तर तक जाने की आवश्यकता न पड़े।
आयोग ने 09 अक्टूबर 2025 और 01 दिसंबर 2025 को अपील निरस्त करने वाले तत्कालीन अधिकारियों को हरियाणा सेवा का अधिकार (प्रबंधन) विनियम, 2015 के विनियम 10 के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया है। साथ ही अधिनियम की धारा 17(1)(डी) के अंतर्गत स्पष्टीकरण मांगा गया है कि विभागीय कार्रवाई की संस्तुति क्यों न की जाए।
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शिकायतकर्ता को हुई असुविधा को ध्यान में रखते हुए आयोग ने 5,000 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह राशि प्रारंभिक रूप से नगर निगम अंबाला के कोष से अदा की जाएगी, जिसे बाद में संबंधित अधिकारियों से नियमानुसार वसूल किया जा सकेगा।
आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि 13 मार्च 2026 तक मुआवजा अदा नहीं किया गया, तो अधिनियम की धारा 17(2) के तहत आगे की कार्रवाई करते हुए अतिरिक्त दंड और मुआवजा भी निर्धारित किया जा सकता है।
साथ ही आयुक्त, नगर निगम अंबाला को 16 मार्च 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने तथा संबंधित अधिकारी को 09 मार्च 2026 तक स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए हैं।
उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार नागरिक सेवाओं में लापरवाही या अनावश्यक विलंब के मामलों में सख्त रुख अपनाए हुए है। आयोग ने दोहराया कि सेवाएं समयबद्ध, पारदर्शी और प्रभावी तरीके से उपलब्ध कराना ही सरकार की प्राथमिकता है।

