हरियाणा सरकार और कारागार विभाग द्वारा बंदियों को सुधार की राह पर लाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस जोड़ने के लिए लगातार ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश की जेलों में चलाए जा रहे व्यापक सुधार कार्यक्रमों के तहत बंदियों को विभिन्न व्यवसायों और कौशलों में व्यवस्थित प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे जेल से बाहर निकलने के बाद एक सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन जी सकें।
कारागार विभाग की इन सुधारात्मक पहलों का मुख्य उद्देश्य बंदियों को अपराध की दुनिया से दूर रखना, उनके भीतर छिपी प्रतिभा को निखारना और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। इसके लिए जेलों के भीतर सिलाई, बढ़ईगीरी, हस्तशिल्प, पेंटिंग, बुनाई, कृषि कार्य और अन्य कई व्यावसायिक गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन कार्यक्रमों में भाग लेने वाले बंदी न केवल नए कौशल सीख रहे हैं, बल्कि अपने आत्मविश्वास में भी बढ़ोतरी महसूस कर रहे हैं।
हाल ही में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड शिल्प मेले में जेलों में तैयार किए गए उत्पादों के लिए लगाए गए स्टॉल ने इस पहल को और भी व्यापक पहचान दिलाई है। यह स्टॉल केवल उत्पादों की बिक्री का केंद्र नहीं है, बल्कि समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश भी है कि सही अवसर और मार्गदर्शन मिलने पर हर व्यक्ति अपने जीवन में बड़ा और सकारात्मक बदलाव ला सकता है। मेले में आए पर्यटक इन उत्पादों की गुणवत्ता और कारीगरी की सराहना कर रहे हैं और साथ ही इस सोच की भी तारीफ कर रहे हैं कि बंदियों को सुधार और पुनर्वास का मौका दिया जाना चाहिए।
अधिकारियों के अनुसार, इन उत्पादों की बिक्री से मिलने वाली आय का एक हिस्सा बंदियों के कल्याण और उनके परिवारों की सहायता में भी लगाया जाता है। इससे न केवल बंदियों को आर्थिक संबल मिलता है, बल्कि उनमें यह भावना भी पैदा होती है कि वे समाज के लिए उपयोगी बन सकते हैं। यह पहल ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसे अभियानों को भी मजबूती देती है।
हरियाणा सरकार का मानना है कि सजा के साथ-साथ सुधार और पुनर्वास भी उतना ही जरूरी है। यदि बंदियों को सही दिशा और प्रशिक्षण दिया जाए, तो वे समाज में दोबारा अपराध की राह पर जाने के बजाय एक जिम्मेदार नागरिक बन सकते हैं। यही कारण है कि सरकार और कारागार विभाग मिलकर इन कार्यक्रमों का दायरा लगातार बढ़ा रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक बंदियों को इसका लाभ मिल सके।
समाज के विभिन्न वर्गों से भी इस पहल को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। कई सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने कहा है कि इस तरह के प्रयास न केवल बंदियों के जीवन को बदल सकते हैं, बल्कि समाज में उनके प्रति नजरिए को भी मानवीय और संवेदनशील बना सकते हैं।
कुल मिलाकर, हरियाणा कारागार विभाग की यह पहल इस बात का प्रमाण है कि यदि नीति, नीयत और प्रयास सही दिशा में हों, तो जेल भी सुधार और नई शुरुआत का केंद्र बन सकती है, जहां से लोग एक बेहतर भविष्य की ओर कदम बढ़ा सकते हैं।


