चंडीगढ़। गृह विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव Sumita Misra ने राज्य में ‘गरीब कैदियों को सहायता’ योजना के अंतर्गत संशोधित दिशा-निर्देश और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है। इन विस्तृत गाइडलाइंस का उद्देश्य ऐसे आर्थिक रूप से अक्षम कैदियों को समयबद्ध वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है, जो केवल जुर्माना राशि जमा न कर पाने अथवा जमानत राशि के अभाव में जेलों में निरुद्ध हैं।
अतिरिक्त मुख्य सचिव ने बताया कि कई मामलों में कैदी सजा पूरी कर लेने के बावजूद केवल आर्थिक अक्षमता के कारण जेल में रह जाते हैं। इस योजना के माध्यम से ऐसे जरूरतमंद बंदियों की पहचान कर उन्हें सहायता प्रदान की जाएगी, ताकि वे विधिक प्रक्रियाएं पूरी कर स्वतंत्र जीवन की ओर लौट सकें।
संशोधित एसओपी के अनुसार, जेल प्रशासन, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण तथा संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर पात्र कैदियों की सूची तैयार की जाएगी। पात्रता की जांच के बाद जुर्माना अथवा जमानत राशि के भुगतान के लिए सरकारी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे किसी भी गरीब कैदी को केवल धन के अभाव में जेल में न रहना पड़े।
डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि यह पहल सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कानून के समक्ष आर्थिक स्थिति किसी के लिए बाधा न बने और मानवीय दृष्टिकोण के साथ न्याय प्रणाली को अधिक संवेदनशील बनाया जाए।
राज्य सरकार के इस निर्णय से जेलों में अनावश्यक भीड़ कम होने के साथ-साथ गरीब एवं वंचित वर्ग के कैदियों को त्वरित राहत मिलने की उम्मीद है।


