हरियाणा सरकार ने टांगरी, मारकंडा और बेगना नदियों की जलधारण क्षमता बढ़ाने और बाढ़ जोखिम घटाने के लिए मानसून 2026 से पहले 65 लाख घन मीटर से अधिक गाद निकासी का प्रस्ताव रखा, टेंडर प्रक्रिया जारी।
हरियाणा की सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री श्रुति चौधरी ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि प्रदेश में प्रत्येक मानसून सत्र से पहले नदियों की वार्षिक डी-सिल्टिंग की कोई तय परंपरा नहीं है। हालांकि, हाल के वर्षों में भारी वर्षा और बाढ़ की स्थिति को देखते हुए सरकार ने विशेष कदम उठाए हैं।
🌊 2025 में विशेष अभियान के तहत हुई गाद निकासी
मंत्री ने बताया कि लगातार बाढ़ जैसे हालात के कारण नदियों में बड़े पैमाने पर गाद जमा हुई। इसी के मद्देनज़र वर्ष 2025 में विशेष विकासात्मक गतिविधि के रूप में डी-सिल्टिंग अभियान चलाया गया।
30 जून 2025 से पहले:
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टांगरी नदी से लगभग 5.50 लाख घन मीटर मिट्टी निकाली गई
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मारकंडा नदी से लगभग 37,500 घन मीटर गाद हटाई गई
इस अभियान का उद्देश्य जलधारण क्षमता बढ़ाना और बाढ़ के खतरे को कम करना था।
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🚜 मानसून 2026 से पहले बड़ा एक्शन प्लान
सरकार ने मानसून 2026 से पहले बड़े स्तर पर गाद निकासी का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्ताव के अनुसार:
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टांगरी नदी से लगभग 53.85 लाख घन मीटर
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मारकंडा नदी से लगभग 10.94 लाख घन मीटर
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बेगना नदी से लगभग 0.60 लाख घन मीटर
गाद निकाली जाएगी।
इन कार्यों के लिए टेंडर प्रक्रिया जारी है और विभागीय स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
⚠️ बाढ़ नियंत्रण और जल संरक्षण पर फोकस
सरकार का कहना है कि डी-सिल्टिंग से न केवल बाढ़ का जोखिम कम होगा, बल्कि नदियों की जलधारण क्षमता में वृद्धि से सिंचाई और भूजल पुनर्भरण को भी लाभ मिलेगा।
राज्य सरकार का लक्ष्य है कि मानसून 2026 से पहले सभी प्रस्तावित कार्य पूरे कर लिए जाएं, ताकि प्रदेश में संभावित बाढ़ की स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

