हरियाणा सरकार ने प्रदेश के औद्योगिक ढांचे को सुदृढ़ बनाने और ‘विकसित हरियाणा’ के लक्ष्य को गति देने के लिए एक अहम निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने HEEP-2020 (हरियाणा उद्यम और रोजगार नीति-2020) तथा इससे जुड़ी 16 प्रोत्साहन योजनाओं में व्यापक संशोधनों को मंजूरी दी है। यह फैसला विशेष रूप से राज्य में कार्यरत सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) को ध्यान में रखकर लिया गया है, ताकि उन्हें संचालन में आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों से राहत मिल सके।
सरकार के इस कदम का उद्देश्य न केवल औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देना है, बल्कि पहले से स्थापित औद्योगिक इकाइयों को भी अधिक प्रतिस्पर्धी और आत्मनिर्भर बनाना है। मुख्यमंत्री की बजट घोषणा के अनुरूप लिए गए इस निर्णय से उन औद्योगिक इकाइयों को विशेष लाभ मिलेगा, जो अधिसूचित औद्योगिक क्षेत्रों के बाहर संचालित हो रही हैं और लंबे समय से विभिन्न नीतिगत व प्रशासनिक चुनौतियों का सामना कर रही थीं।
MSMEs को मिलेगी नई राहत
अब तक कई MSMEs को भूमि उपयोग, बुनियादी ढांचे, वित्तीय प्रोत्साहन और स्वीकृतियों की प्रक्रिया में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। संशोधित नीति के तहत इन इकाइयों को सरल प्रक्रियाएं, अधिक पारदर्शिता और तेजी से लाभ सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है। इससे न केवल मौजूदा उद्यमों का विस्तार आसान होगा, बल्कि नए उद्यमियों को भी राज्य में निवेश के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
रोजगार सृजन पर पड़ेगा सकारात्मक असर
HEEP-2020 नीति का मूल उद्देश्य रोजगार के अवसरों को बढ़ाना है। प्रोत्साहन योजनाओं में किए गए बदलावों से औद्योगिक इकाइयों को विस्तार का अवसर मिलेगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। विशेष रूप से युवाओं और तकनीकी कुशल श्रमिकों के लिए यह नीति लाभकारी साबित हो सकती है।
संतुलित औद्योगिक विकास की दिशा में पहल
सरकार का यह निर्णय केवल बड़े औद्योगिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन इलाकों पर भी केंद्रित है जहां औद्योगिक गतिविधियां कम हैं। अधिसूचित क्षेत्रों के बाहर स्थित इकाइयों को राहत देने से क्षेत्रीय संतुलन को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में भी उद्योगों का विकास संभव होगा।
निवेशकों का बढ़ेगा भरोसा
नीतिगत सुधारों और प्रोत्साहन योजनाओं में स्पष्टता आने से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। राज्य सरकार का मानना है कि यह कदम हरियाणा को निवेश के अनुकूल राज्य के रूप में और मजबूत बनाएगा।
कुल मिलाकर, HEEP-2020 और इससे जुड़ी योजनाओं में किया गया यह बदलाव हरियाणा के औद्योगिक विकास, MSMEs के सशक्तिकरण और रोजगार सृजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है। यह फैसला न केवल वर्तमान उद्योगों को मजबूती देगा, बल्कि भविष्य के विकास की नींव भी रखेगा।


