हरियाणा ने यह सिद्ध कर दिया है कि मजबूत नीति, आधुनिक तकनीक और किसानों की मेहनत के बल पर बिना समुद्री तटरेखा के भी मत्स्य उत्पादन में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी स्थान हासिल किया जा सकता है। हैदराबाद में आयोजित राष्ट्रीय स्तर के मत्स्य पालन सम्मेलन को संबोधित करते हुए हरियाणा के मत्स्य पालन मंत्री Shyam Singh Rana ने कहा कि हरियाणा आज देश के अग्रणी भूमि-आबद्ध राज्यों में शामिल है और मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है।
मंत्री श्री श्याम सिंह राणा ने जानकारी देते हुए बताया कि राज्य ने लगभग 23,850 हेक्टेयर जल क्षेत्र का प्रभावी उपयोग करते हुए कुल 2.04 लाख मीट्रिक टन मछली का उत्पादन किया है। यह उपलब्धि इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि हरियाणा के पास समुद्र तट नहीं है, फिर भी राज्य ने अंतर्देशीय मत्स्य पालन के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है।
उन्होंने बताया कि भूमि-आबद्ध राज्यों की श्रेणी में पंजाब मछली उत्पादन में प्रथम स्थान पर है, जबकि हरियाणा दूसरे स्थान पर है। यह उपलब्धि राज्य सरकार की दूरदर्शी नीतियों, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और मछुआरा समुदाय को दिए जा रहे निरंतर सहयोग का परिणाम है। मंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार का लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाना ही नहीं, बल्कि मछुआरों की आय में वृद्धि, रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना भी है।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री राणा ने कहा कि हरियाणा में तालाब आधारित मत्स्य पालन, बायोफ्लॉक तकनीक, एकीकृत कृषि-मत्स्य मॉडल और उच्च गुणवत्ता वाली फिश सीड उत्पादन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इन नवाचारों के चलते राज्य में प्रति हेक्टेयर मछली उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा प्रशिक्षण, सब्सिडी और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराए जाने से किसान और युवा बड़ी संख्या में मत्स्य पालन की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
मंत्री ने यह भी कहा कि मत्स्य पालन आज केवल पारंपरिक आजीविका का साधन नहीं रह गया है, बल्कि यह एक लाभकारी उद्यम के रूप में उभर रहा है। हरियाणा सरकार मछली प्रसंस्करण, कोल्ड चेन, मार्केटिंग और निर्यात की संभावनाओं को भी बढ़ावा दे रही है, ताकि किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य मिल सके।
राष्ट्रीय सम्मेलन में देशभर से आए विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और राज्य प्रतिनिधियों ने हरियाणा के मॉडल की सराहना की। श्री राणा ने कहा कि राज्य भविष्य में उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ जल संसाधनों के संरक्षण और पर्यावरण संतुलन को भी प्राथमिकता देगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में हरियाणा भूमि-आबद्ध राज्यों में मत्स्य पालन के क्षेत्र में नई मिसाल कायम करेगा।
सम्मेलन के अंत में मंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वय, वैज्ञानिक अनुसंधान और जमीनी स्तर पर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से भारत वैश्विक मत्स्य उत्पादन में और मजबूत भूमिका निभाएगा, जिसमें हरियाणा की भागीदारी निरंतर बढ़ती रहेगी।


