स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने विभागीय समीक्षा बैठक में प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने के लिए कई अहम निर्देश दिए। बैठक में उन्होंने स्पष्ट कहा कि मरीजों की सुरक्षा और बेहतर उपचार व्यवस्था सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसके लिए जमीनी स्तर पर ठोस और समयबद्ध कदम उठाने होंगे।
अतिरिक्त मुख्य सचिव ने उपायुक्तों और सिविल सर्जनों को निर्देश दिए कि सभी सरकारी अस्पतालों में बिजली की वायरिंग, पावर पैनल और अन्य विद्युत उपकरणों का व्यापक व नियमित निरीक्षण कराया जाए। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में किसी भी प्रकार की लापरवाही मरीजों और स्टाफ दोनों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। इसलिए विद्युत सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए और जहां भी कमियां पाई जाएं, उन्हें तत्काल दूर किया जाए।
बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट में सख्ती
डॉ. मिश्रा ने अस्पतालों में बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट को लेकर भी कड़ा रुख अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जैव-चिकित्सीय कचरे का सही ढंग से निस्तारण न होने से संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में सभी स्वास्थ्य संस्थानों को निर्धारित नियमों के अनुसार कचरा प्रबंधन करना होगा। इस संबंध में नियमित निगरानी और ऑडिट सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए।
अस्पताल कल्याण कोष का पारदर्शी उपयोग
बैठक में अस्पताल कल्याण कोष के उपयोग पर भी चर्चा हुई। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने कहा कि यह कोष मरीजों की सुविधाएं बढ़ाने के लिए है, इसलिए इसके पारदर्शी और उद्देश्यपूर्ण उपयोग को प्राथमिकता दी जाए। किसी भी स्तर पर अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी खर्चों का स्पष्ट रिकॉर्ड रखा जाना चाहिए।
महिला स्वास्थ्य के लिए समग्र दृष्टिकोण
महिला स्वास्थ्य को लेकर डॉ. मिश्रा ने समग्र दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि कैंसर स्क्रीनिंग कार्यक्रमों को और प्रभावी बनाया जाए, ताकि समय पर बीमारी की पहचान हो सके। इसके साथ ही महिलाओं में एनीमिया, ऑस्टियोपोरोसिस, मेनोपॉज़ केयर और मेंस्ट्रुअल हाइजीन से जुड़े कार्यक्रमों को सुदृढ़ किया जाए। उन्होंने कहा कि महिला स्वास्थ्य में सुधार का सीधा असर पूरे परिवार और समाज के स्वास्थ्य पर पड़ता है।
शिशु मृत्यु दर घटाने के लिए NICU सुदृढ़ीकरण
अतिरिक्त मुख्य सचिव ने शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाइयों (NICU) को मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि NICU में आधुनिक उपकरण, प्रशिक्षित स्टाफ और बेहतर प्रोटोकॉल सुनिश्चित किए जाएं। इससे नवजात शिशुओं को समय पर और गुणवत्तापूर्ण उपचार मिल सकेगा।
अधिकारियों से जवाबदेही की अपेक्षा
बैठक के अंत में डॉ. सुमिता मिश्रा ने सभी अधिकारियों से इन निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन की अपेक्षा जताई। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार केवल नीतियों से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सख्त निगरानी और जिम्मेदारी से संभव है। सरकार का लक्ष्य है कि हर नागरिक को सुरक्षित, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिलें, और इन निर्देशों से उस दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।


