हरियाणा सरकार ने धान खरीद में अनियमितताओं पर 12 एफआईआर दर्ज कर 75 अधिकारियों पर विभागीय जांच शुरू की, 6.37 करोड़ रुपये की रिकवरी कर पारदर्शी ऑनलाइन सिस्टम लागू किया।
हरियाणा सरकार ने धान खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री श्री राजेश नागर ने विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का जवाब देते हुए बताया कि राज्य में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फसलों की खरीद पूरी तरह पारदर्शी एवं ऑनलाइन प्रणाली से की जा रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि धान की खरीद भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार सरकारी एजेंसियों के माध्यम से की जाती है और सरकार शुरू से ही इस प्रक्रिया की निगरानी कर रही थी।
अक्टूबर-नवंबर 2025 में हुई भौतिक जांच
राज्य के सभी जिलों में संयुक्त कमेटियां गठित कर अक्टूबर और नवंबर 2025 के दौरान राइस मिलों में भंडारित धान की भौतिक जांच करवाई गई। जांच के दौरान धान की कमी और अन्य अनियमितताएं सामने आईं, जिन्हें गंभीरता से लिया गया।
12 एफआईआर और 75 अधिकारियों पर विभागीय जांच
प्राथमिक जांच के बाद जिन जिलों में प्रथम दृष्टया अनियमितताएं पाई गईं, वहां अधिकारियों, कर्मचारियों, आढ़तियों और राइस मिलरों के खिलाफ कुल 12 एफआईआर दर्ज की गईं। इसके अतिरिक्त खाद्य विभाग, खरीद संस्थाओं और मार्केटिंग बोर्ड के 75 अधिकारियों/कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय जांच शुरू की गई है।
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6.37 करोड़ रुपये की रिकवरी
सरकार की सख्त कार्रवाई के तहत राइस मिलरों से लगभग 6.37 करोड़ रुपये की रिकवरी कर सरकारी खजाने में जमा करवाई जा चुकी है। मंत्री ने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
रबी और खरीफ सीजन 2026-27 में नई तकनीकी व्यवस्था
आगामी रबी सीजन 2026-27 में खरीद प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाया जा रहा है। इसके तहत:
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पैदावार डेटा में संशोधन
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मोबाइल ऐप के माध्यम से जियो-टैग और QR कोड आधारित गेट पास
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वाहनों का ऑटोमेटिक कैप्चर सिस्टम
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मंडी, खरीद केंद्र, गोदाम और राइस मिलों की जियो-फेंसिंग
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प्रवेश और निकास द्वार पर सीसीटीवी कैमरे
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किसानों का बायोमेट्रिक सत्यापन
इसके अलावा खरीफ खरीद सीजन 2026-27 के दौरान राइस मिलों और गोदामों की भौतिक जांच भी मोबाइल ऐप के माध्यम से की जाएगी, जिससे पूरी प्रक्रिया डिजिटल निगरानी में रहेगी।
राज्य सरकार का दावा है कि इन तकनीकी सुधारों से खरीद प्रणाली अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और किसानों के हित में होगी।

