उत्तर भारत में लगातार बढ़ती सर्दी और संभावित शीतलहर को देखते हुए हरियाणा सरकार ने एहतियाती कदम उठाते हुए ‘शीत लहर कार्य योजना’ तैयार की है। इसका उद्देश्य ठंड के प्रकोप से जन-धन, पशुधन और फसलों को होने वाले संभावित नुकसान को न्यूनतम करना है। इस संबंध में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तायुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने सभी संबंधित विभागों को समय रहते व्यापक और प्रभावी इंतज़ाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
वित्तायुक्त ने स्वास्थ्य, विकास एवं पंचायत, शिक्षा, कृषि, पशुपालन, शहरी स्थानीय निकाय और सामाजिक न्याय सहित सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने को कहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शीतलहर के दौरान सबसे अधिक जोखिम में रहने वाले वर्ग—बुजुर्ग, बच्चे, असहाय, बेघर लोग और खुले में कार्य करने वाले श्रमिक—सरकार की प्राथमिकता में रहेंगे। इसके लिए जिलों को पहले से तैयार रहने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली को सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक दवाइयों, गर्म कंबलों, हीटर और जीवनरक्षक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। शीतलहर से जुड़ी बीमारियों जैसे हाइपोथर्मिया, सांस संबंधी समस्याओं और हृदय रोगियों के लिए विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है। एंबुलेंस सेवाओं और आपातकालीन हेल्पलाइन को 24 घंटे सक्रिय रखने के भी निर्देश हैं।
विकास एवं पंचायत तथा शहरी स्थानीय निकाय विभागों को शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में रैन बसेरों, आश्रय स्थलों और सामुदायिक भवनों में अस्थायी ठहराव की व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। बेघर और जरूरतमंद लोगों के लिए अलाव, कंबल वितरण और गर्म भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया है। साथ ही, स्वयंसेवी संगठनों और सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से राहत कार्यों को तेज करने की योजना बनाई गई है।
कृषि और पशुपालन विभाग को भी अलर्ट मोड पर रहने को कहा गया है। किसानों को फसलों को पाले और अत्यधिक ठंड से बचाने के लिए आवश्यक सलाह समय पर जारी की जाएगी। पशुपालन विभाग को पशुधन के लिए गर्म आश्रय, चारे की उपलब्धता और पशु चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि ठंड के कारण पशुओं की मृत्यु या बीमारी को रोका जा सके।
शिक्षा विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि मौसम की स्थिति के अनुसार स्कूलों के समय में बदलाव या अन्य आवश्यक निर्णय स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय कर लिए जाएं। बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर बल दिया गया है।
डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि ‘शीत लहर कार्य योजना’ के प्रभावी क्रियान्वयन से ठंड के दुष्प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। उन्होंने सभी जिला उपायुक्तों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में स्थिति पर लगातार नजर रखें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करें।
उल्लेखनीय है कि हरियाणा सरकार हर वर्ष सर्दी के मौसम में शीतलहर से निपटने के लिए पूर्व तैयारी करती है। इस वर्ष भी समय रहते बनाई गई यह कार्य योजना राज्य को ठंड के संभावित संकट से सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


