हरियाणा के मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini ने यमुना नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी परिस्थिति में गंदा अथवा बिना उपचारित पानी यमुना में नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी ड्रेनों से पानी केवल पूर्ण उपचार के बाद ही नदी में छोड़ा जाए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि यमुना में गिरने वाले सभी आउटफॉल प्वाइंट्स की पहचान कर वहां सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) के निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए, ताकि प्रदूषित जल को रोका जा सके। इसके साथ ही उन्होंने भिवानी–घग्गर ड्रेन की वहन क्षमता बढ़ाने के कार्य को भी तय समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने बाढ़ राहत से जुड़ी लंबित योजनाओं की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि जिन योजनाओं में देरी हुई है, उन्हें शीघ्र पूरा किया जाए और जनवरी माह के अंत तक सभी लंबित योजनाओं के टेंडर अनिवार्य रूप से लगाए जाएं। उन्होंने संकेत दिया कि इस विषय पर जल्द ही एक अलग समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने उपचारित जल के पुन: उपयोग पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि संबंधित विभाग आपसी समन्वय से ऐसी योजनाएं तैयार करें, जिनके माध्यम से ट्रीटेड वॉटर को कृषि कार्यों और औद्योगिक उपयोग तक पहुंचाया जा सके। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण और पुन: उपयोग केवल एक विभाग की नहीं, बल्कि सभी विभागों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
इस उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव Rajesh Khullar, वित्त आयुक्त एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव राजस्व Sumita Misra, पर्यावरण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव Sudhir Rajpal, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव Arun Kumar Gupta, सिंचाई विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव Anurag Aggarwal, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव A. K. Singh, अतिरिक्त प्रधान सचिव Saket Kumar तथा ओएसडी Bharat Bhushan Bharti सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि यमुना की स्वच्छता और जल संसाधनों का सतत प्रबंधन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और इस दिशा में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।


