हरियाणा सरकार द्वारा नशीले पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे सघन अभियान में वर्ष 2025 के दौरान बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। राज्य में एनडीपीएस अधिनियम के तहत रिकॉर्ड 3,738 एफआईआर दर्ज की गईं, जबकि 6,801 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि सरकार और पुलिस प्रशासन नशे के कारोबार को जड़ से खत्म करने के लिए पूरी सख्ती के साथ काम कर रहे हैं।
गृह विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2020 से 2025 के बीच हरियाणा में कुल 20,519 एफआईआर दर्ज की गईं और 35,207 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई केवल छोटे तस्करों तक सीमित नहीं रही, बल्कि अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय नशा तस्करी नेटवर्क को भी निशाना बनाया गया है।
डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि बीते वर्षों में पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों ने समन्वित रणनीति अपनाते हुए नशा तस्करों के पूरे नेटवर्क को तोड़ने पर फोकस किया। इसके तहत पंजाब, राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों से जुड़े गिरोहों पर शिकंजा कसा गया, वहीं विदेशी लिंक रखने वाले तस्करों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की गई। इस अभियान के दौरान बड़ी मात्रा में हेरोइन, गांजा, अफीम और सिंथेटिक ड्रग्स जब्त की गईं, जिससे नशे की सप्लाई चेन को गहरा झटका लगा।
उन्होंने कहा कि सरकार की नीति केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि नशा तस्करों की आर्थिक रीढ़ तोड़ना भी इस अभियान का अहम हिस्सा है। इसी के तहत करोड़ों रुपये की अवैध संपत्तियां जब्त की गईं, जिनमें मकान, वाहन, बैंक खाते और अन्य संपत्तियां शामिल हैं। इससे तस्करों की अवैध कमाई पर सीधा प्रहार हुआ है और नशे के कारोबार को आर्थिक रूप से कमजोर किया गया है।
गृह विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव ने यह भी बताया कि युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए प्रवर्तन के साथ-साथ जन-जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। स्कूलों, कॉलेजों और ग्रामीण क्षेत्रों में नशे के दुष्प्रभावों को लेकर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि समाज के हर वर्ग को इस लड़ाई में भागीदार बनाया जा सके। इसके अलावा, नशा मुक्ति केंद्रों को भी सशक्त किया जा रहा है, जिससे नशे की लत से पीड़ित लोगों को सही समय पर उपचार और परामर्श मिल सके।
राज्य सरकार का मानना है कि नशे के खिलाफ यह लड़ाई केवल पुलिस या प्रशासन की नहीं, बल्कि पूरे समाज की है। इसी सोच के साथ आने वाले समय में भी सख्त कानून प्रवर्तन, तकनीकी निगरानी और सामाजिक सहयोग के जरिए नशा तस्करी पर और कड़ा प्रहार किया जाएगा।
हरियाणा में नशे के खिलाफ हासिल की गई यह उपलब्धि न केवल कानून-व्यवस्था की मजबूती को दर्शाती है, बल्कि युवाओं के सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी मानी जा रही है।


