हरियाली तीज 2025 की सही तारीख और पूजा मुहूर्त जानें। 26 जुलाई या 27 जुलाई को कब मनाई जाएगी हरियाली तीज, और व्रत का पारण समय, साथ ही तीज माता के मंत्र और महत्व भी पढ़ें।
हरियाली तीज 2025 सावन महीने की शुक्ल तृतीया तिथि को मनाई जाती है। 2025 में सावन शुक्ल तृतीया तिथि 26 जुलाई से शुरू होकर 27 जुलाई तक रहेगी, जिससे तीज की तारीख को लेकर लोगों में भ्रम है कि हरियाली तीज 26 जुलाई को होगी या 27 जुलाई। ज्योतिषाचार्य डॉ. मृत्युञ्जय तिवारी के अनुसार, हरियाली तीज 27 जुलाई को मनाई जाएगी क्योंकि तिथि के हिसाब से सूर्योदय के समय तृतीया तिथि 27 जुलाई को ही मान्य होती है।
हरियाली तीज 2025 की सही तारीख
पंचांग के अनुसार, तृतीया तिथि 26 जुलाई की रात 10:41 बजे से शुरू होकर 27 जुलाई की रात 10:41 बजे तक मान्य रहेगी। लेकिन व्रत और पूजा के लिए तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय से किया जाता है। 26 जुलाई के सूर्योदय पर द्वितीया तिथि है, इसलिए पूरा दिन द्वितीया माना जाएगा, जबकि 27 जुलाई को सूर्योदय के बाद तृतीया तिथि मान्य होती है। अतः हरियाली तीज 27 जुलाई को मनाई जाएगी।
हरियाली तीज का शुभ पूजा मुहूर्त
हरियाली तीज की पूजा प्रायः शाम के प्रदोष काल में की जाती है। 27 जुलाई को सूर्यास्त का समय 7:15 बजे है, वहीं पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 7:15 से 8:33 बजे तक रहेगा। इस समय तीज माता, भगवान शिव और गणेश जी की विधिवत पूजा की जाती है।
दिन के अन्य महत्वपूर्ण मुहूर्त हैं—
अभिजीत मुहूर्त: 12:00 बजे दोपहर से 12:55 बजे तक
ब्रह्म मुहूर्त: 4:17 से 4:58 बजे सुबह
निशिता मुहूर्त: 28 जुलाई को 12:07 से 12:49 बजे तक
हरियाली तीज पर बनेगा रवि योग
27 जुलाई को रवि योग भी होगा जो शाम 4:23 बजे शुरू होकर अगले दिन सुबह 5:40 बजे तक रहेगा। यह योग व्रत की सफलता के लिए शुभ माना जाता है।
हरियाली तीज व्रत का पारण
जो महिलाएं हरियाली तीज का व्रत रखेंगी, उनका पारण 28 जुलाई को सूर्योदय (सुबह 5:40 बजे के बाद) किया जाएगा।
हरियाली तीज के फायदे
हरियाली तीज का व्रत करने से सुहागनों को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है, जबकि कुंवारी युवतियों को मनचाहा जीवनसाथी मिलता है। योग्य वर की इच्छा रखने वाली महिलाओं के लिए भी यह व्रत अत्यंत लाभकारी है।
तीज माता की पूजा मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।देवि देवि उमे गौरी त्राहि माम करुणा निधे,
ममापराधा छन्तव्य भुक्ति मुक्ति प्रदा भव।।


