हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने करनाल में आर्य समाज के कार्यक्रम में कहा कि राष्ट्र की प्रगति संस्कृति के बिना संभव नहीं है। उन्होंने स्वामी दयानंद सरस्वती के विचारों को आत्मसात करने और युवाओं को संस्कारों से जोड़ने पर जोर दिया।
हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष श्री हरविन्द्र कल्याण ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की सच्ची प्रगति उसकी सांस्कृतिक जड़ों के बिना संभव नहीं है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि यदि समाज अपनी परंपराओं, मूल्यों और संस्कारों से कट जाता है, तो विकास की दिशा भी भटक सकती है। श्री कल्याण करनाल में आर्य समाज द्वारा आयोजित महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती के जन्मोत्सव एवं बोधोत्सव समारोह के समापन कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
अपने संबोधन में उन्होंने स्वामी दयानंद सरस्वती को नमन करते हुए कहा कि उनके विचार आज भी समाज को सही दिशा दिखाने का काम करते हैं, खासकर तब, जब देश और समाज अनेक तरह की चुनौतियों का सामना कर रहे हों। उन्होंने कहा कि आर्य समाज द्वारा नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रयास सराहनीय और प्रेरणादायक है।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि हमारे महापुरुषों ने अत्यंत कठिन परिस्थितियों में भी देश, धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए संघर्ष किया। गुलामी के लंबे दौर के बाद देश आज़ाद जरूर हुआ, लेकिन आज भी सामाजिक, आर्थिक और नैतिक चुनौतियां हमारे सामने मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि देश को फिर से उन ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए हर नागरिक का सक्रिय योगदान जरूरी है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि यह लक्ष्य केवल सरकार के प्रयासों से नहीं, बल्कि पूरे समाज की भागीदारी से ही पूरा हो सकता है। आत्मनिर्भरता और आधुनिक तकनीक जरूरी हैं, लेकिन उतना ही जरूरी है कि युवा पीढ़ी संस्कारों, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी के भाव से भी जुड़ी रहे।
इस अवसर पर श्री हरविन्द्र कल्याण ने आर्य समाज के कार्यों की सराहना करते हुए अपने निजी कोष से सभा के लिए 11 लाख रुपये देने की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि ऐसे सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक, समाजसेवी और आर्य समाज के पदाधिकारी मौजूद रहे। सभी ने स्वामी दयानंद सरस्वती के विचारों को आत्मसात कर समाज और राष्ट्र के उत्थान के लिए कार्य करने का संकल्प लिया।


