केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पशुओं की नस्ल सुधार और बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन के लिए पशुपालन विभाग द्वारा कुछ पशुओं में जिनोमिक चिप लगाई जा रही है। इस आधुनिक तकनीक की मदद से पशुओं में समय-समय पर होने वाली बीमारियों, उनके स्वास्थ्य में होने वाले बदलाव और अन्य जरूरी जानकारियों पर नजर रखी जा सकेगी। उन्होंने बताया कि इन चिप्स के जरिए वैज्ञानिक शोध भी किए जा रहे हैं, जिससे पशुधन की गुणवत्ता और उत्पादकता को और बेहतर बनाया जा सके।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आज के दौर में पशुपालन को वैज्ञानिक आधार पर मजबूत करना बेहद जरूरी है। जिनोमिक चिप तकनीक के माध्यम से पशुओं के स्वास्थ्य से जुड़ा डाटा एकत्र किया जाता है, जिससे यह पता लगाया जा सकता है कि किसी खास नस्ल में कौन-कौन सी बीमारियों की संभावना अधिक रहती है और किस तरह के सुधारात्मक कदम उठाने की जरूरत है। इससे न केवल पशुओं की देखभाल बेहतर होगी, बल्कि किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन (एनडीएलएम) कार्यक्रम शुरू किया हुआ है, जिसके तहत पशुओं के स्वास्थ्य और पहचान से जुड़ी व्यवस्थाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जा रहा है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत पशुओं को एफएमडी (खुरपका-मुंहपका) रोग से बचाव के लिए टीकाकरण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में यह वैक्सीन केंद्र सरकार की ओर से मुफ्त में उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि पशुपालकों पर किसी तरह का आर्थिक बोझ न पड़े।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पशुओं में समय पर टीकाकरण और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। इससे न केवल पशुओं की मृत्यु दर में कमी आएगी, बल्कि दूध और अन्य पशु उत्पादों के उत्पादन में भी बढ़ोतरी होगी। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि पशुपालन को एक लाभकारी और टिकाऊ व्यवसाय के रूप में विकसित किया जाए।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि हरियाणा में करीब 70 मोबाइल वेटनरी क्लीनिक चलाए जा रहे हैं, जो दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में जाकर पशुओं का इलाज और स्वास्थ्य जांच कर रहे हैं। इन मोबाइल क्लीनिकों से पशुपालकों को अपने गांव में ही विशेषज्ञ सेवाएं मिल रही हैं, जिससे समय और पैसे दोनों की बचत हो रही है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर पशुपालन क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए लगातार काम कर रही हैं। आधुनिक तकनीक, डिजिटल निगरानी और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से पशुओं की नस्ल सुधार, उत्पादकता में वृद्धि और किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
अंत में उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जिनोमिक तकनीक और डिजिटल प्लेटफॉर्म का दायरा और बढ़ाया जाएगा, ताकि देश का पशुधन अधिक स्वस्थ, उत्पादक और रोगों से सुरक्षित बन सके। इससे पशुपालकों को सीधा लाभ मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।


