Brahma temple: आप अक्सर सोचते होंगे कि ब्रह्माजी की पूजा क्यों नहीं की जाती। पर ऐसा क्यों है? श्रृष्टि की रचना करने वाले ब्रह्माजी को आखिर किस बात की सजा दी गई?
Brahma temple: हर व्यक्ति जानता है कि परमपिता ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना की है। लेकिन आप जानते हैं कि ब्रह्माजी ने एक बार एक बड़ी भूल की थी। शिव पुराण में एक दिलचस्प कहानी है कि भगवान शिव ने ब्रह्माजी को झूठ बोलने और उन्हें शाप देने के बारे में कहा। यह कहानी हमें बताती है कि झूठ बोलने के कितने घातक परिणाम हो सकते हैं, खासकर जब बात देवताओं और स्वयं भगवान की होती है।
ब्रह्मा-विष्णु में विवाद
कथा कहती है कि एक बार ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठ कौन है इस बारे में बहस हुई। दोनों ने अपनी शक्ति और महानता का दावा किया। इस विवाद को सुलझाने के लिए भगवान शिव एक अद्भुत ज्योतिर्लिंग के रूप में आए। उनका कहना था कि इस ज्योतिर्लिंग का आदि या अंत खोजना सबसे अच्छा होगा।ब्रह्माजी ने हंस का रूप धारण करके आकाश में जाकर ज्योतिर्लिंग की शुरुआत खोजने की कोशिश की, जबकि विष्णुजी ने वराह का रूप धारण करके पृथ्वी में जाकर ज्योतिर्लिंग का अंत खोजने की कोशिश की।
ब्रह्माजी का झूठ
कई वर्षों की कड़ी मेहनत के बावजूद, दोनों ने ज्योतिर्लिंग का अंत या कुछ भी नहीं पाया। विष्णु ने अपनी गलती मान ली और भगवान शिव से माफी मांगी। लेकिन भगवान ने झूठ बोलने का सहारा लिया। उन्होंने केतकी के फूल को साक्षी बनाकर कहा कि उन्होंने ज्योतिर्लिंग का अंत पाया है।
ब्रह्माजी को श्राप
शिव भगवान ने ब्रह्माजी के झूठ को समझा। उन्हें भी केतकी के फूल से सच्चाई बताने को कहा, लेकिन केतकी ने भी ब्रह्माजी का साथ दिया और झूठ बोला। भगवान शिव इससे क्रोधित हो गए। उन्होंने ब्रह्माजी को श्राप देकर कहा कि वे कभी नहीं पूजे जाएंगे और किसी भी यज्ञ में भाग लेने का अधिकार नहीं होगा। केतकी के फूल को भी श्राप दिया गया था कि उन्हें कभी भी भगवान शिव की पूजा में नहीं चढ़ाया जाएगा।
इस श्राप के कारण आज भी बहुत कम ब्रह्माजी मंदिर हैं और उनकी विशेष पूजा नहीं की जाती। भगवान शिव को केतकी का फूल नहीं चढ़ाया जाता।
यह कहानी हमें बताती है कि झूठ बोलना पाप है, विशेष रूप से भगवान के सामने। झूठ बोलने से न केवल व्यक्ति को नुकसान होता है बल्कि दूसरों को भी नुकसान हो सकता है। इसलिए हमें झूठ से दूर रहना चाहिए और हमेशा सत्य बोलना चाहिए।
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