भारतीय मुद्रा बाजार में गुरुवार को सकारात्मक संकेत देखने को मिले, जब अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूती के साथ खुला। हालिया वैश्विक घटनाक्रम और दावोस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने निवेशकों की धारणा को बेहतर किया है, जिसका सीधा असर रुपये और घरेलू शेयर बाजार पर पड़ा।
डॉलर के मुकाबले रुपये में सुधार
विदेशी मुद्रा बाजार में गुरुवार को शुरुआती कारोबार के दौरान रुपया 15 पैसे की मजबूती के साथ 91.50 प्रति डॉलर पर खुला। यह बढ़त ऐसे समय पर दर्ज की गई है, जब एक दिन पहले ही रुपया अपने ऐतिहासिक निचले स्तर के करीब 91.65 प्रति डॉलर तक फिसल गया था। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया मजबूती अल्पकालिक राहत का संकेत है, जो वैश्विक स्तर पर तनाव में कमी की उम्मीद से जुड़ी हुई है।
ट्रंप के बयान का असर
दावोस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए कि अमेरिका और भारत के बीच जल्द ही एक बड़ी आर्थिक डील हो सकती है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपीय देशों पर कोई नया टैरिफ लगाने की योजना नहीं है। इन बयानों को वैश्विक व्यापार और भू-राजनीतिक माहौल में स्थिरता की दिशा में कदम माना जा रहा है, जिससे उभरते बाजारों की मुद्राओं को सहारा मिला।
शेयर बाजार में तेजी
रुपये में मजबूती का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ नजर आया। शुरुआती कारोबार में निवेशकों का रुझान सकारात्मक रहा।
बीएसई सेंसेक्स 533.37 अंकों की तेजी के साथ 82,443 के स्तर पर पहुंच गया।
एनएसई निफ्टी 157.20 अंकों की बढ़त के साथ 25,314.70 पर कारोबार करता दिखा।
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, रुपये में स्थिरता से विदेशी निवेशकों के भरोसे में सुधार हो सकता है, जिससे इक्विटी बाजार को समर्थन मिलता है।
वैश्विक संकेत
अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की स्थिति भी अपेक्षाकृत स्थिर रही। डॉलर इंडेक्स में मामूली 0.02% की बढ़त दर्ज की गई और यह 98.78 पर पहुंच गया। वहीं, कच्चे तेल की कीमतों में भी हल्की तेजी देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड 0.17% बढ़कर 65.35 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जो भारत जैसे आयातक देशों के लिए फिलहाल संतुलित स्तर माना जा रहा है।
विदेशी निवेशकों का रुख
हालांकि बाजार में पूरी तरह उत्साह का माहौल नहीं है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने बुधवार को शुद्ध रूप से 1,787.66 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की थी। इसके बावजूद, वैश्विक स्तर पर तनाव कम होने के संकेतों और ट्रंप के बयान से बाजारों को फिलहाल राहत मिली है।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का कहना है कि रुपये की दिशा आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम, अमेरिकी मौद्रिक नीति और विदेशी निवेश के प्रवाह पर निर्भर करेगी। फिलहाल, रुपये और शेयर बाजार में दिखी यह मजबूती निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है, लेकिन सतर्कता बरतना अब भी जरूरी है।


