दिल्ली विधानसभा का दूसरा सत्र मंगलवार, 6 जनवरी को जारी है, जहां शिक्षा से जुड़े एक मुद्दे ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। सत्र के दौरान दिल्ली के शिक्षा मंत्री Ashish Sood ने आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal को पत्र लिखकर उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मंत्री का कहना है कि अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली सरकार और शिक्षक समुदाय के खिलाफ भ्रामक जानकारी फैलाकर अनावश्यक विवाद खड़ा किया है।
शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि हाल ही में यह दावा किया गया था कि दिल्ली सरकार ने सरकारी और निजी स्कूलों के शिक्षकों को आवारा कुत्तों की गिनती का काम सौंपा है। मंत्री ने इस आरोप को पूरी तरह निराधार और तथ्यहीन बताते हुए कहा कि इस तरह की अफवाहें न केवल शिक्षकों की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती हैं।
आशीष सूद ने कहा कि इस प्रकार के बयान न सिर्फ अतार्किक हैं, बल्कि शासन के सुचारू संचालन में भी बाधा उत्पन्न करते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं और उन्हें लेकर गलत जानकारी फैलाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। मंत्री ने यह भी कहा कि ऐसे बयान जनता के बीच भ्रम पैदा करते हैं और सरकार के प्रति विश्वास को कमजोर करते हैं।
पत्र के माध्यम से शिक्षा मंत्री ने अरविंद केजरीवाल से दिल्ली की जनता और शिक्षक समुदाय से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की अपील की है। उनका कहना है कि राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप होते रहते हैं, लेकिन शिक्षा और बच्चों के भविष्य से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक बयानबाजी से दूर रखा जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्कूलों की व्यवस्था और छात्रों के कल्याण से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
दिल्ली विधानसभा सत्र के दौरान यह मुद्दा गंभीर बहस का विषय बन गया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस बयान को लेकर तीखी नोकझोंक देखने को मिली। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि शिक्षकों की जिम्मेदारियां पहले से तय हैं और उन्हें किसी भी गैर-शैक्षणिक या असंबंधित कार्य में नहीं लगाया गया है।
शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में यदि इस तरह की भ्रामक सूचनाएं या अफवाहें फैलाई जाती हैं, तो सरकार सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में आलोचना का स्वागत है, लेकिन तथ्यहीन आरोपों से न तो शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाना स्वीकार्य है और न ही शिक्षकों के सम्मान से खिलवाड़ किया जा सकता है।
दिल्ली विधानसभा का यह सत्र अब न केवल नीतिगत चर्चाओं के लिए, बल्कि राजनीतिक बयानबाजी और जवाबी आरोपों के कारण भी चर्चा में बना हुआ है।


