किसानों के मसीहा, समाज सुधारक और दूरदर्शी राजनेता दीनबन्धु सर छोटू राम जी की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन किया गया। इसी के साथ बसंत पंचमी के पावन अवसर पर प्रदेशभर में श्रद्धा, उल्लास और सांस्कृतिक चेतना के रंग बिखरे नजर आए। इस अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों, संगोष्ठियों और श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन कर उनके योगदान को स्मरण किया गया तथा मां सरस्वती की आराधना कर ज्ञान, विवेक और सद्बुद्धि की कामना की गई।
दीनबन्धु सर छोटू राम जी को भारतीय कृषि और किसान हितों के लिए किए गए ऐतिहासिक कार्यों के कारण आज भी किसान समाज श्रद्धापूर्वक याद करता है। उन्होंने अपने जीवन का प्रत्येक क्षण किसानों, मजदूरों और कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। ब्रिटिश काल में रहते हुए भी उन्होंने शोषणकारी व्यवस्थाओं के खिलाफ सशक्त कानून बनाए और किसानों को साहूकारों के चंगुल से मुक्त कराने का मार्ग प्रशस्त किया। उनके द्वारा लागू किए गए ऋण राहत और भूमि सुधार संबंधी कानून आज भी सामाजिक न्याय के सशक्त उदाहरण माने जाते हैं।
सर छोटू राम जी का मानना था कि देश की समृद्धि का मार्ग गांव और खेतों से होकर गुजरता है। उन्होंने किसानों को केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि राष्ट्र की रीढ़ बताया। उनकी नीतियों और विचारों ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी और किसान को आत्मसम्मान के साथ जीने का अधिकार दिलाया। हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के ग्रामीण अंचलों में उनके योगदान की छाप आज भी स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है।
बसंत पंचमी के अवसर पर ज्ञान, विद्या और कला की देवी मां सरस्वती की पूजा-अर्चना की गई। विद्यालयों, महाविद्यालयों और सांस्कृतिक संस्थानों में विशेष कार्यक्रम आयोजित हुए, जहां विद्यार्थियों ने पीले वस्त्र धारण कर मां सरस्वती से ज्ञान और सफलता का आशीर्वाद मांगा। बसंत पंचमी को नई शुरुआत, सकारात्मक ऊर्जा और बौद्धिक जागरण का प्रतीक माना जाता है, जो सर छोटू राम जी के विचारों से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि दीनबन्धु सर छोटू राम जी का जीवन संघर्ष, सेवा और सामाजिक समरसता का प्रेरक उदाहरण है। उनके आदर्श आज के समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जब किसानों की समृद्धि और ग्रामीण विकास देश की प्राथमिक आवश्यकता है। उन्होंने समाज में समानता, न्याय और आत्मनिर्भरता का जो संदेश दिया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बना रहेगा।
दीनबन्धु सर छोटू राम जी की जयंती और बसंत पंचमी का यह संयुक्त अवसर हमें यह संकल्प लेने की प्रेरणा देता है कि हम किसान कल्याण, सामाजिक न्याय और ज्ञान के प्रसार के लिए निरंतर प्रयास करते रहें। उनका जीवन और विचार राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में सदैव प्रकाशस्तंभ की तरह मार्ग दिखाते रहेंगे।


