नई दिल्ली। देश में संविधान द्वारा दिए गए मार्गदर्शन और मूल्यों के अनुरूप विकास की रफ्तार लगातार तेज हो रही है। इसी संदेश को दो पंक्तियों— “दिशा दे दी संविधान नै, विकसित हो रह्या म्हारा देश… किसान-कमेरे आगै बढ़ रे, होया समरस म्हारा प्रदेश…” — के माध्यम से प्रभावी रूप से अभिव्यक्त किया गया, जो देश में बढ़ती समरसता, प्रगति और सामाजिक एकजुटता का चित्रण करती हैं।
संविधान दिवस के अवसर पर विभिन्न सामाजिक और सरकारी मंचों पर यह संदेश दिया गया कि भारत आज न केवल आर्थिक रूप से सुदृढ़ हो रहा है, बल्कि किसान, मजदूर, कर्मचारी और आम नागरिकों के सामूहिक प्रयासों से समाज अधिक संतुलित और समरस बन रहा है। किसानों और कमेरों (मजदूरों) की अग्रणी भूमिका को देश की रीढ़ बताते हुए कहा गया कि इनके योगदान से ही प्रदेश और राष्ट्र हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं।
वक्ताओं ने कहा कि संविधान ने भारत को एक मजबूत दिशा, अधिकार और कर्तव्य दिए हैं, जिनके पालन से लोकतंत्र और अधिक सशक्त बन रहा है। केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा चलाई जा रही विकासपरक योजनाएँ ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में सकारात्मक परिवर्तन ला रही हैं।
समारोह में उपस्थित नागरिकों ने संविधान के मूल्यों—न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व—को जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया और देश की प्रगति में सहयोग देने की प्रतिज्ञा की।
दिशा दे दी संविधान नै, विकसित हो रह्या म्हारा देश…
किसान-कमेरे आगै बढ़ रे, होया समरस म्हारा प्रदेश… pic.twitter.com/i5mRuU5SdJ— Nayab Saini (@NayabSainiBJP) November 26, 2025


