मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा जैसे आध्यात्मिक आयोजन समाज में नैतिक मूल्यों, सामाजिक सद्भाव और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे चंडीगढ़ में आयोजित भागवत कथा कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे आयोजनों से न केवल आध्यात्मिक चेतना का विस्तार होता है, बल्कि समाज को सत्य, करुणा, कर्तव्य और सेवा जैसे मूल्यों से भी जोड़ा जाता है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति और परंपरा का आधार आध्यात्मिक ज्ञान में निहित है और श्रीमद्भागवत कथा जैसे ग्रंथ जीवन को सही दिशा देने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि आज के तेज़ी से बदलते सामाजिक परिदृश्य में नैतिक मूल्यों को सुदृढ़ करना अत्यंत आवश्यक है और ऐसे आयोजन इस दिशा में प्रभावी माध्यम बनते हैं।
सीएम सैनी ने कहा कि हरियाणा सरकार भगवद्गीता के अमर संदेश को मानव-मात्र तक पहुंचाने के उद्देश्य से हर वर्ष कुरुक्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव का आयोजन करती है। यह महोत्सव न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारत की आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का सशक्त माध्यम भी है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि गत 25 नवंबर 2025 को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में सहभागिता कर प्रदेशवासियों का उत्साह बढ़ाया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने ज्योतिसर तीर्थ में महाभारत थीम पर आधारित ज्योतिसर अनुभव केंद्र का लोकार्पण भी किया, जो श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक अनूठा आकर्षण है।
उन्होंने कहा कि ज्योतिसर अनुभव केंद्र आधुनिक तकनीक के माध्यम से महाभारत के जीवंत प्रसंगों को प्रस्तुत करता है, जिससे लोग भारतीय इतिहास और संस्कृति को अनुभव के रूप में समझ सकें। यह केंद्र विशेष रूप से युवाओं के लिए ज्ञानवर्धक है, क्योंकि यहां उन्हें महाभारत के आदर्शों, मूल्यों और ऐतिहासिक महत्व को रोचक तरीके से जानने का अवसर मिलता है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रदेशवासियों और देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं से अपील की कि वे ज्योतिसर अनुभव केंद्र का अवश्य भ्रमण करें, ताकि महाभारत के जीवित वृत्तांत को महसूस कर सकें और गीता के संदेशों को अपने जीवन में आत्मसात कर सकें।
अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि आध्यात्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सामाजिक एकता को मजबूती मिलती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के कार्यक्रम भविष्य में भी समाज को नैतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनाने में अहम भूमिका निभाते रहेंगे।


