मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अचानक जदयू प्रदेश कार्यालय का दौरा किया। ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी भी उनके साथ थे। मुख्यमंत्री प्रदेश कार्यालय में लगभग पंद्रह मिनट बिताए।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अचानक जदयू प्रदेश कार्यालय का दौरा किया। ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी भी उनके साथ थे। मुख्यमंत्री प्रदेश कार्यालय में लगभग पंद्रह मिनट बिताए। जब वे वापस आए, वहां मौजूद पार्टी की महिला सदस्यों ने उन्हें रोककर गाना शुरू कर दिया, “केहू केतनो होई बाकी नीतीश न होई जईसन राज्य चलाए कि दूसरे के परवेश न होई।”
प्रदेश कार्यालय में भी महिला कार्यकर्ताओं के इस गीत पर जिंदाबाद के नारे लगे। साथ ही, कार्यकर्ताओं ने नारा लगाया कि हमारा नेता नीतीश कुमार की तरह है। मुख्यमंत्री के साथ महिला कार्यकर्ताओं ने भी अपनी तस्वीर ली। 4.45 बजे बिना किसी सूचना के मुख्यमंत्री जदयू प्रदेश कार्यालय पहुंचे। पार्टी कार्यालय में वह लगभग पंद्रह मिनट तक रहे।
पार्टी कार्यालय का एक चक्कर लगाकर वह बाहर निकले
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष से पूछा गया तो पता चला कि वे बीमार होने के कारण नहीं आए हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पार्टी के प्रदेश कार्यालय में उपस्थित लोगों से भी बात की। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी उनके आवेदन स्वीकार किए। पार्टी कार्यालय का एक चक्कर लगाकर वह बाहर निकले। पार्टी कार्यालय में भी पार्टी पदाधिकारियों से बातचीत की।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से वक्फ बिल पर भी मीडिया ने पूछा, लेकिन उन्होंने ठीक है कहकर इसे टाल दिया। यह हाल के दिनों में पहला है जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिना सूचना के जदयू दफ्तर में पहुंचे और वहां मौजूद कार्यकर्ताओं से बातचीत की।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जदयू कार्यालय दौरे के दौरान उनके एक नेता का भी बयान सामने आया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सभी के हित में विचार करते हैं। पूरे देश में उनके जैसा नेता नहीं मिलेगा।
मंगलवार को पूर्व मंत्री जयकुमार सिंह ने उक्त बातें बताईं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार में हुआ विकास उनकी देन है। बिहार की विशाल विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह जगह सूफी संतों, महावीर और महात्मा बुद्ध की धरती थी।
राज्य चालिस देशों की राजधानी रहा है, लेकिन कुछ नेताओं ने जाति और धर्म के नाम पर इसे बदनाम किया है। वक्फ बोर्ड के मुद्दे पर, नीतीश कुमार ने अल्पसंख्यक समाज के साथ दृढ़ता से समर्थन दिया। उनकी सरकार ने अल्पसंख्यकों के लिए बहुत सारे कार्यक्रम बनाए हैं। कब्रिस्तानों को भी घेरने का काम किया है। नीतीश कुमार ने भी गठबंधन की राजनीति में मुस्लिम समाज पर अत्याचार को कभी बर्दाश्त नहीं किया।
इसलिए गठबंधन बिहार में दो बार टूटा। वक्फ बोर्ड के मामलों में अपने कार्यकाल में कभी दखल नहीं दिया और नहीं करने दिया। उन्होंने विपक्ष को चुनौती दी कि बिहार में नीतीश कुमार के समान कोई और नेता है।
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