देश में जल संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन और राज्यों के बीच समन्वय को और सुदृढ़ करने की दिशा में आज दिल्ली में एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता आदरणीय केंद्रीय जल शक्ति मंत्री C. R. Patil ने की। बैठक में विभिन्न राज्यों से जुड़े जल संसाधन प्रबंधन के मुद्दों के साथ-साथ कई समसामयिक और दूरगामी महत्व के विषयों पर गहन एवं सार्थक चर्चा की गई।
बैठक में राजस्थान के माननीय मुख्यमंत्री Bhajan Lal Sharma भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। इसके अलावा संबंधित मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी, जल संसाधन विशेषज्ञ और विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। बैठक का उद्देश्य जल संरक्षण, जल उपयोग की दक्षता, अंतर-राज्यीय जल सहयोग और भविष्य की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ठोस रणनीति तैयार करना रहा।
चर्चा के दौरान प्रदेशों में जल संसाधनों के वर्तमान हालात, जल संकट से निपटने के उपाय, वर्षा जल संचयन, नदियों और जलाशयों के संरक्षण, सिंचाई परियोजनाओं की प्रगति तथा पेयजल आपूर्ति से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से विचार किया गया। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल ने कहा कि जल प्रबंधन केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए केंद्र, राज्य और समाज के सभी वर्गों के बीच समन्वित प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने सतत विकास के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए जल संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग पर जोर दिया।
बैठक में इस बात पर भी सहमति बनी कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को देखते हुए जल नीति में नवाचार और आधुनिक तकनीकों का अधिक से अधिक उपयोग किया जाना चाहिए। ड्रिप इरिगेशन, माइक्रो इरिगेशन, स्मार्ट वॉटर मैनेजमेंट सिस्टम और डेटा आधारित योजना जैसे उपायों को बढ़ावा देने पर चर्चा की गई। साथ ही, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जल संरक्षण को जन आंदोलन का रूप देने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।
राजस्थान जैसे जल-अभाव वाले राज्यों के संदर्भ में मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने राज्य की चुनौतियों और आवश्यकताओं को बैठक में रखा। उन्होंने केंद्र सरकार के सहयोग से चल रही और प्रस्तावित परियोजनाओं पर चर्चा करते हुए कहा कि जल सुरक्षा राज्य के विकास और जनता के जीवन स्तर से सीधे जुड़ी हुई है। उन्होंने अंतर-राज्यीय सहयोग और केंद्र-राज्य समन्वय को और मजबूत करने की आवश्यकता जताई।
बैठक के दौरान यह भी कहा गया कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों का संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके लिए दीर्घकालिक योजना, पारदर्शी क्रियान्वयन और नियमित समीक्षा व्यवस्था को अपनाया जाएगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति पर सतत निगरानी रखी जाए और समयबद्ध तरीके से लक्ष्यों को पूरा किया जाए।
कुल मिलाकर, यह बैठक जल संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में नीति निर्धारण, सहयोग और समन्वय को नई दिशा देने वाली साबित हुई। केंद्र और राज्यों के साझा प्रयासों से देश में जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


