केंद्रीय बजट 2026 को लेकर देशभर में चर्चाएं तेज हैं और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी उम्मीदें इस बार खास तौर पर अधिक हैं। कोविड-19 के बाद स्वास्थ्य ढांचे की अहमियत जिस तरह सामने आई है, उसके बाद से लगातार यह मांग उठती रही है कि हेल्थ सेक्टर में निवेश बढ़ाया जाए। ऐसे में बजट 2026 को स्वास्थ्य सेवाओं के कायाकल्प का अवसर माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार सरकार स्वास्थ्य बीमा, निवारक देखभाल, डिजिटल हेल्थ और मेडिकल रिसर्च जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दे सकती है।
सबसे बड़ी उम्मीद स्वास्थ्य बीमा कवरेज के विस्तार को लेकर है। आयुष्मान भारत योजना के तहत पहले से करोड़ों लोगों को लाभ मिल रहा है, लेकिन अब इसके दायरे को और व्यापक बनाने की संभावना जताई जा रही है। माना जा रहा है कि बजट 2026 में मध्यम वर्ग और असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम में सब्सिडी या नई योजनाओं की घोषणा हो सकती है, जिससे इलाज का बोझ आम लोगों पर कम पड़े।
निवारक देखभाल (Preventive Healthcare) भी इस बजट का अहम फोकस हो सकती है। सरकार बीमारियों के इलाज के बजाय उन्हें रोकने पर जोर दे सकती है। इसके तहत नियमित स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण, पोषण कार्यक्रम और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की रोकथाम के लिए विशेष योजनाओं को बढ़ावा दिए जाने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि निवारक देखभाल पर निवेश करने से लंबे समय में स्वास्थ्य खर्च में कमी आएगी।
बजट 2026 में डिजिटल हेल्थ को भी नई गति मिलने की संभावना है। ई-हेल्थ रिकॉर्ड, टेलीमेडिसिन, ऑनलाइन परामर्श और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डायग्नोसिस जैसी सेवाओं को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त बजट आवंटन किया जा सकता है। खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में डिजिटल माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने पर सरकार का जोर रह सकता है। इससे डॉक्टरों की कमी और भौगोलिक बाधाओं को काफी हद तक दूर किया जा सकेगा।
इसके अलावा मेडिकल रिसर्च और इनोवेशन में निवेश बढ़ने की भी पूरी संभावना है। देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए दवाओं, वैक्सीन, मेडिकल उपकरणों और बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में रिसर्च को प्रोत्साहन दिया जा सकता है। सरकारी और निजी क्षेत्र की साझेदारी के जरिए रिसर्च इकोसिस्टम को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया जा सकता है।
स्वास्थ्य ढांचे के लिहाज से सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों के विस्तार की भी उम्मीद की जा रही है। नए मेडिकल कॉलेज, नर्सिंग संस्थान और पैरामेडिकल ट्रेनिंग सेंटर्स खोलने से न केवल स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर होंगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
कुल मिलाकर, बजट 2026 से यह उम्मीद की जा रही है कि स्वास्थ्य क्षेत्र को प्राथमिकता देते हुए इसे मजबूत, सुलभ और आधुनिक बनाया जाएगा। यदि स्वास्थ्य बीमा, निवारक देखभाल, डिजिटल हेल्थ और मेडिकल रिसर्च पर ठोस कदम उठाए गए, तो यह बजट वास्तव में देश के हेल्थ सेक्टर के कायाकल्प की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।


