होली का नाम आते ही रंग, गुलाल और मस्ती की तस्वीर सामने आ जाती है, लेकिन उत्तर प्रदेश के ब्रज क्षेत्र में होली केवल एक दिन का पर्व नहीं बल्कि आस्था, संस्कृति और परंपरा का भव्य उत्सव होती है। मथुरा, वृंदावन, बरसाना, नंदगांव और गोकुल में मनाई जाने वाली ब्रज होली 2026 भी अपने अनोखे अंदाज़ के कारण देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करेगी।
ब्रज में होली की शुरुआत बसंत पंचमी से मानी जाती है और इसका समापन रंगवाली होली के कई दिनों बाद हुरंगा होली के साथ होता है। लगभग 40 दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी से जुड़ी लीलाओं की झलक देखने को मिलती है।
लड्डू से लाठियों तक, हर दिन अलग रंग
ब्रज होली का सबसे पहला बड़ा आयोजन बरसाना में लड्डू होली से शुरू होता है। राधा रानी मंदिर में होने वाली यह होली भक्तों के लिए खास आकर्षण का केंद्र रहती है, जहां श्रद्धालु एक-दूसरे पर रंगों की जगह लड्डू उछालते हैं। इसके बाद बरसाना और नंदगांव में विश्व प्रसिद्ध लठमार होली खेली जाती है, जिसमें महिलाएं प्रतीकात्मक रूप से पुरुषों पर लाठियां बरसाती हैं और पुरुष ढाल से अपना बचाव करते हैं। यह परंपरा भगवान कृष्ण और राधा से जुड़ी लोककथाओं को जीवंत कर देती है।
फूलों और भक्ति की होली
वृंदावन की फूलों वाली होली आध्यात्मिक और सौंदर्य से भरपूर होती है। मंदिरों में रंगों की जगह फूलों की वर्षा की जाती है, जिससे वातावरण भक्तिमय हो जाता है। इसी दौरान विधवाओं की होली भी मनाई जाती है, जो समाज में समरसता और समानता का संदेश देती है।
गोकुल और बलदेव की अनोखी होली
गोकुल में छड़ीमार होली और रमण रेती की होली अपने अलग स्वरूप के लिए जानी जाती है। यहां भजन-कीर्तन और पारंपरिक लोकगीतों के साथ रंग खेला जाता है। इसके बाद मथुरा-वृंदावन में होलिका दहन होता है, जो बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है।
रंगवाली होली के अगले दिन बलदेव स्थित दौजी मंदिर में हुरंगा होली खेली जाती है। इस होली में महिलाएं पुरुषों के वस्त्र फाड़कर उन्हें रंगों में भिगो देती हैं। यह आयोजन भगवान बलराम और गोपियों की कथाओं से जुड़ा हुआ है और ब्रज होली का सबसे रोमांचक दृश्य माना जाता है।
ब्रज होली का सांस्कृतिक महत्व
ब्रज की होली केवल रंगों का उत्सव नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, लोक परंपराओं और भक्ति भाव का संगम है। यहां हर आयोजन श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और रास परंपरा से जुड़ा हुआ है। यही कारण है कि हर साल हजारों विदेशी पर्यटक भी ब्रज होली का अनुभव लेने मथुरा-वृंदावन पहुंचते हैं।
ब्रज होली 2026 एक बार फिर यह संदेश देगी कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि प्रेम, आनंद और आपसी भाईचारे का उत्सव है।


