Pippali ke Fayde: Pippali एक आयुर्वेदिक औषधि है जो पाचन, इम्यूनिटी, खांसी और त्वचा की समस्याओं में फायदेमंद है। जानें इसके फायदे और सेवन का तरीका।
Pippali ke Fayde: आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों की बात हो और पिप्पली का नाम न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता। पिप्पली (Pippali) को आयुर्वेद में एक शक्तिशाली औषधि माना जाता है, जो पाचन, श्वसन, त्वचा और इम्यून सिस्टम के लिए बेहद फायदेमंद है। यह न केवल इम्यूनिटी बूस्टर के रूप में काम करती है, बल्कि कफ, सूजन, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारियों में भी राहत देती है।
पिप्पली क्या है?
पिप्पली एक बेलनुमा फूलदार पौधा है जो पाइपरेसी परिवार से संबंधित है। इसके सूखे फल का उपयोग औषधीय और मसाले के रूप में किया जाता है। इसका स्वाद हल्का तीखा और मीठा होता है, जो इसे काली मिर्च से अलग बनाता है।
आयुर्वेदिक फायदे
1. इम्यूनिटी बढ़ाने में सहायक
पिप्पली का नियमित सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है। यह शरीर को संक्रमण से बचाने में मदद करती है और मौसम बदलाव में होने वाले रोगों से सुरक्षा प्रदान करती है।
2. पाचन तंत्र को दुरुस्त करे
पिप्पली गैस, अपच, एसिडिटी जैसी समस्याओं में राहत देती है। यह मेटाबॉलिज्म को तेज करती है जिससे शरीर में वसा कम होती है।
3. सांस की समस्याओं में कारगर
अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, खांसी और कफ जैसी श्वसन संबंधी परेशानियों में पिप्पली बेहद असरदार मानी जाती है। यह कफ को बाहर निकालने में मदद करती है और फेफड़ों को साफ करती है।
4. जोड़ों के दर्द और सूजन में राहत
इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण सूजन और दर्द को कम करने में कारगर होते हैं, खासकर आर्थराइटिस और जोड़ों के दर्द में।
5. त्वचा के लिए लाभकारी
पिप्पली खून को शुद्ध करती है, जिससे चेहरे पर एक नेचुरल ग्लो आता है। यह कील-मुंहासे, खुजली और अन्य स्किन प्रॉब्लम्स में भी मदद करती है।
Pippali Kaise Khayein? (सेवन विधि)
खांसी-जुकाम में: 1/4 से 1/2 चम्मच पिप्पली चूर्ण को शहद या गर्म पानी के साथ लें।
चाय या काढ़े में: पिप्पली की जड़ (पिपरामूल) को पानी में उबालकर पिएं।
आधुनिक विकल्प: डॉक्टर की सलाह से पिप्पली कैप्सूल या टैबलेट फॉर्म में भी ली जा सकती है।
किन्हें नहीं लेना चाहिए पिप्पली?
गर्भवती महिलाओं और अत्यधिक गर्म体 वाले लोगों को पिप्पली के सेवन से बचना चाहिए या आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
दादी-नानी के नुस्खों में अमूल्य औषधि
पिप्पली का ज़िक्र ‘चरक संहिता’ और ‘सुश्रुत संहिता’ जैसे प्राचीन ग्रंथों में भी किया गया है। ये सदियों से घरेलू उपचारों में उपयोग की जाती रही है, और आज भी उतनी ही प्रभावशाली मानी जाती है।
क्यों जरूरी है पिप्पली को अपनी दिनचर्या में शामिल करना?
अगर आप इम्यूनिटी मजबूत करना, पाचन सुधारना, और सांस या स्किन की समस्याओं से राहत पाना चाहते हैं, तो पिप्पली को अपने आहार या हर्बल रूटीन में जरूर शामिल करें – लेकिन विशेषज्ञ की सलाह से।
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