भारतीय प्रशासनिक सेवा की 2007 बैच की वरिष्ठ अधिकारी अनिंदिता मित्रा ने औपचारिक रूप से पंजाब की मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के रूप में कार्यभार ग्रहण कर लिया है। उनके इस दायित्व संभालने के साथ ही राज्य में चुनावी व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़, पारदर्शी और मतदाता-केंद्रित बनाने की दिशा में नए प्रयासों की उम्मीद जताई जा रही है। इससे पूर्व अनिंदिता मित्रा पंजाब सरकार में विद्यालय शिक्षा, उच्च शिक्षा और भाषा विभाग की प्रशासनिक सचिव के रूप में अपनी सेवाएं दे चुकी हैं।
कार्यभार ग्रहण करने के बाद अपने पहले वक्तव्य में अनिंदिता मित्रा ने कहा कि पंजाब जैसे महत्वपूर्ण राज्य में संवैधानिक संस्था का नेतृत्व करना उनके लिए गर्व और जिम्मेदारी दोनों है। उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि आयोग ने पिछले कई दशकों में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित कर लोकतंत्र की नींव को मजबूत किया है। उन्होंने मतदाता सूचियों की शुद्धता और समावेशिता को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का आधार बताया।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि उनका कार्यालय पंजाब में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और संवर्धन के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि मतदाता पंजीकरण से लेकर मतदान और मतगणना तक प्रत्येक चरण में मतदाताओं को बेहतर सुविधाएं प्रदान करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। इसके साथ ही भारत निर्वाचन आयोग के सभी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
अनिंदिता मित्रा ने चुनावी प्रक्रिया में प्रौद्योगिकी के अधिक प्रभावी उपयोग पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक, डेटा प्रबंधन और पारदर्शी प्रणालियों के माध्यम से चुनावों को और अधिक कुशल और विश्वसनीय बनाया जा सकता है। साथ ही उन्होंने टीमवर्क और जनभागीदारी को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि अधिक से अधिक नागरिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग ले सकें।
उन्होंने यह भी कहा कि दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं और युवाओं सहित सभी वर्गों के मतदाताओं के लिए सुलभ और सुरक्षित मतदान व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। मतदाता जागरूकता कार्यक्रमों को और प्रभावी बनाया जाएगा, ताकि लोग अपने मताधिकार के महत्व को समझें और बिना किसी भय या बाधा के मतदान कर सकें।
प्रशासनिक अनुभव और लोक प्रशासन की गहरी समझ रखने वाली अनिंदिता मित्रा से उम्मीद की जा रही है कि उनके नेतृत्व में पंजाब में चुनाव प्रबंधन और संचालन की गुणवत्ता में और सुधार होगा। राज्य में पारदर्शी, निष्पक्ष और तकनीकी रूप से सशक्त चुनाव प्रणाली लागू करना उनकी प्राथमिकता रहेगी, जिससे लोकतंत्र में जनता का विश्वास और अधिक मजबूत हो सके।


