हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कैथल जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक के बाद कहा कि जनता की शिकायतों का त्वरित समाधान ही सुशासन की पहचान है। एक गंभीर हत्या मामले को सीबीआई को सौंपने के निर्देश और श्रम विभाग की अनियमितताओं की जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है।
हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने स्पष्ट किया है कि जनप्रतिनिधि और अधिकारी जनता की सेवा के लिए हैं और उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही सुशासन की भावना के खिलाफ है और ऐसे मामलों को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखा जाना चाहिए।
श्री विज कैथल में आयोजित जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने बताया कि बैठक के दौरान कई मामलों का मौके पर ही निस्तारण किया गया, जबकि कुछ जटिल प्रकरणों को नियमानुसार आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को सौंपा गया है। उनका कहना था कि प्रशासन का उद्देश्य सिर्फ फाइलें आगे बढ़ाना नहीं, बल्कि आम नागरिक को वास्तविक राहत पहुंचाना होना चाहिए।
एक गंभीर हत्या के लंबित मामले को लेकर मंत्री ने कहा कि इसकी निष्पक्ष और गहन जांच के लिए इसे केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। उन्होंने बताया कि पहले भी इस विषय में पत्राचार हो चुका है और अब गृह सचिव से बात कर इस मामले को तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। जब तक मामला औपचारिक रूप से सीबीआई को नहीं सौंपा जाता, तब तक राज्य पुलिस अपनी जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी रखेगी।
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श्रम विभाग में कथित अनियमितताओं को लेकर पूछे गए सवाल पर अनिल विज ने बताया कि जिला स्तर पर जांच के बाद अब मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देश पर एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है, जो पूरे प्रकरण की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा साफ है—जहां भी गड़बड़ी होगी, वहां जिम्मेदारी तय की जाएगी।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री ने कहा कि आम आदमी पार्टी द्वारा लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं और यह जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश भर है। उन्होंने दोहराया कि सरकार का फोकस आरोपों की राजनीति नहीं, बल्कि सेवा और समाधान की राजनीति है।
अनिल विज ने अधिकारियों को दो टूक शब्दों में कहा कि गरीब और जरूरतमंद लोगों की शिकायतों को संवेदनशीलता के साथ सुना जाए और उनका शीघ्र निस्तारण किया जाए, क्योंकि यही सुशासन की असली कसौटी है।


