AI In Education: भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को परीक्षाओं में सह-परीक्षक यानी को-एग्ज़ामिनर का पद मिल सकता है। साथ ही, ओरल एग्ज़ाम्स, यानी मौखिक जांच, अधिक महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
AI In Education: AI दुनिया के तेज बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण है। इसका प्रभाव अब स्कूलों में भी दिखने लगा है। दक्षिण कोरिया जैसे देश ने इसमें काफी प्रगति की है। यहाँ के बहुत से स्कूलों ने AI-बेस्ड डिजिटल टेक्स्टबुक्स का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। माना जा रहा है कि इस बदलाव से पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव हो सकता है।
विद्यार्थी AI टेक्स्टबुक्स से सीख रहे हैं
खबरों के अनुसार, मार्च 2025 से अब तक दक्षिण कोरिया में 30 प्रतिशत स्कूलों ने AI टेक्स्टबुक्स को अपने पाठ्यक्रमों में शामिल कर लिया है। ये किताबें प्राइमरी से हाई स्कूल तक के विद्यार्थियों के लिए हैं और अभी अंग्रेजी और गणित जैसे विषयों से शुरू होती हैं। ये AI टेक्स्टबुक्स बच्चों की समझ, लेवल और आवश्यकताओं के अनुसार सामग्री को बदल सकते हैं। यानी प्रत्येक विद्यार्थी को उसके सीखने की गति के अनुसार पढ़ाया जा सकता है।
शिक्षकों को प्रशिक्षित करना भी एक चुनौती है।
इस नई व्यवस्था के साथ कुछ चुनौतियां भी हैं। शिक्षा देने वालों की ट्रेनिंग सबसे बड़ी चुनौती है। AI-आधारित टेक्स्टबुक्स का सही इस्तेमाल करने के लिए शिक्षकों को नई तकनीक का ज्ञान और क्षमता चाहिए। दक्षिण कोरिया सरकार ने भी इसके लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए हैं ताकि शिक्षक इस बदलाव के साथ खुद को ढाल सकें।
कॉलेजों में AI रोल पर भी चर्चा
स्कूलों में इतने बड़े बदलाव हो रहे हैं, उच्च शिक्षा क्षेत्र भी इससे प्रभावित है। दुनिया भर में विशेषज्ञ AI को कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज में कैसे लागू किया जा सकता है।
LinkedIn के को-फाउंडर रीड हॉफमैन ने कहा कि AI को अब नजरअंदाज करना असम्भव है। उनका कहना है कि मूल्यांकन के पारंपरिक तरीके अब असाइनमेंट और निबंध जैसे कार्यों में AI टूल्स का उपयोग कर रहे हैं।
भविष्य में कृत्रिम बुद्धि हो सकती है ‘को-एग्ज़ामिनर’
हॉफमैन ने सुझाव दिया कि भविष्य में AI को परीक्षाओं में सह-परीक्षक (यानी को-एग्ज़ामिनर) के रूप में कार्य करना चाहिए। साथ ही, छात्रों की समझ को बेहतर तरीके से देखने के लिए मौखिक परीक्षाएं, या ओरल एग्ज़ाम्स, अधिक महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
साथ ही उन्होंने कहा कि AI द्वारा तैयार किए गए निबंध उदाहरण के रूप में काम कर सकते हैं। ये दिखाने के लिए कि सामान्य ज्ञान पर्याप्त नहीं है; गहराई और विश्लेषण आवश्यक हैं।
दक्षिण कोरिया ने AI को अपनी शिक्षा में शामिल करके एक नई दिशा की ओर कदम बढ़ा दिया है। ये परिवर्तन सिर्फ एक देश में नहीं होगा। अगर ये मॉडल कामयाब होता है, तो भविष्य में और भी देश इसे अपना सकते हैं। साथ ही, यह भी स्पष्ट है कि स्कूलों और कॉलेजों को AI के साथ काम करने में कुछ बदलाव करना पड़ेगा। अब मुद्दा सिर्फ AI को अपनाना चाहिए या नहीं; बल्कि, इसे बेहतर तरीके से अपनाया जाए।
For more news: Technology


