टेक्नोलॉजी की दुनिया हर दिन किसी न किसी नई सीमा को पार कर रही है। जो बातें कुछ साल पहले तक सिर्फ फिल्मों और वेब सीरीज की कहानी लगती थीं, आज वे धीरे-धीरे हकीकत बनती जा रही हैं। वेब सीरीज Mismatched 2 में दिखाया गया एक छोटा-सा सीन, जिसमें किसी इंसान की डिजिटल मौजूदगी दिखाई गई थी, अब सिर्फ कल्पना नहीं रह गया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से वैज्ञानिक और टेक कंपनियां Digital Twin यानी किसी व्यक्ति का डिजिटल संस्करण तैयार करने पर काम कर रही हैं।
डिजिटल ट्विन का मतलब है किसी इंसान का ऐसा वर्चुअल मॉडल, जो उसकी आदतों, सोचने के तरीके और बातचीत के अंदाज को कॉपी कर सके। अभी तक इस तकनीक का इस्तेमाल मशीनों, फैक्ट्रियों और बड़े सिस्टम्स की निगरानी के लिए किया जाता रहा है, ताकि उनकी परफॉर्मेंस को बेहतर बनाया जा सके। लेकिन अब यही कॉन्सेप्ट इंसानों पर भी लागू किया जा रहा है। यानी भविष्य में आपका एक ऐसा डिजिटल वर्जन हो सकता है, जो आपकी तरह बात करे, आपके जैसे जवाब दे और आपके व्यवहार की नकल कर सके।
इसके पीछे सबसे बड़ी ताकत है डेटा। आज हम सभी सोशल मीडिया, ईमेल, चैट ऐप्स, वीडियो और वॉइस मैसेज के जरिए लगातार डिजिटल दुनिया में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। यही डेटा AI सिस्टम के लिए कच्चा माल बनता है। एल्गोरिदम इस डेटा को समझकर आपकी भाषा, आपकी पसंद-नापसंद और आपके फैसलों के पैटर्न को सीखता है। इसके बाद उसी आधार पर एक ऐसा डिजिटल मॉडल तैयार किया जाता है, जो आपकी तरह रिएक्ट कर सके।
कुछ देशों में इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल यादों को सहेजने के लिए भी किया जा रहा है। उदाहरण के तौर पर, किसी व्यक्ति के गुजर जाने के बाद उसके परिवार वाले उसके डिजिटल ट्विन से बातचीत कर सकें, ऐसा प्रयोग किया जा रहा है। इसे टेक्नोलॉजी की भाषा में “डिजिटल लेगेसी” या “डिजिटल इम्मॉर्टैलिटी” भी कहा जा रहा है। हालांकि, यह असली इंसान नहीं होता, बल्कि उसके डेटा से तैयार किया गया एक AI मॉडल होता है।
लेकिन इस टेक्नोलॉजी के साथ कई सवाल भी जुड़े हैं। सबसे बड़ा सवाल प्राइवेसी का है। अगर किसी इंसान का पूरा डिजिटल व्यवहार किसी सिस्टम में स्टोर है, तो उसका गलत इस्तेमाल भी हो सकता है। इसके अलावा यह नैतिक बहस भी तेज हो रही है कि क्या किसी व्यक्ति की डिजिटल कॉपी बनाना सही है? क्या यह भावनात्मक रूप से लोगों को और ज्यादा उलझा सकता है?
टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में डिजिटल ट्विन टेक्नोलॉजी और ज्यादा एडवांस होगी। अभी यह शुरुआती दौर में है, लेकिन जिस तेजी से AI आगे बढ़ रहा है, उसे देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि भविष्य में हर इंसान की एक डिजिटल पहचान होना आम बात हो सकती है।
कुल मिलाकर, टेक्नोलॉजी हमें उस दौर की ओर ले जा रही है जहां इंसान की मौजूदगी सिर्फ उसके शरीर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि डिजिटल दुनिया में भी उसकी एक परछाईं बनी रह सकती है। सवाल बस यही है—क्या हम इस बदलाव के लिए मानसिक और सामाजिक रूप से तैयार हैं?


