गन्ने की खेती: गन्ना किसानों की समस्याओं को दूर करने के लिए केंद्र सरकार संयुक्त समिति बनाएगी। जानें FRP, MSP, तौल में गड़बड़ी और कर्नाटक के किसानों की SAP मांग से जुड़ी पूरी जानकारी।
गन्ने की खेती: गन्ना किसानों को उचित कीमत दिलाने और चीनी मिलों में तौल से जुड़ी शिकायतों का समाधान करने के लिए केंद्र सरकार ने पहल की है। किसानों की समस्याओं पर विचार करने के लिए सरकार एक संयुक्त समिति बनाने जा रही है। इस समिति में किसान संगठनों के प्रतिनिधि, कृषि वैज्ञानिक और केंद्र व राज्य सरकारों के अधिकारी शामिल होंगे। समिति का उद्देश्य गन्ना किसानों की समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए जरूरी सुझाव देना है।
गन्ने की खेती में किसानों को लंबे समय तक मेहनत करनी पड़ती है। खेत तैयार करने से लेकर बुवाई, सिंचाई, खाद, मजदूरी और कटाई तक काफी खर्च होता है। ऐसे में जब गन्ने की तौल में गड़बड़ी या उचित भुगतान नहीं मिलने की शिकायत सामने आती है, तो किसानों की आय पर सीधा असर पड़ता है। सरकार की इस पहल से किसानों को अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद है।
किसानों की समस्याओं पर हुई कई घंटे तक बैठक
केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी के मुताबिक, दिल्ली में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में किसानों के मुद्दों पर विस्तृत बैठक हुई। बैठक करीब तीन से चार घंटे तक चली। इसमें केंद्र और राज्य सरकारों के अधिकारियों, मंत्रियों तथा किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
बैठक के दौरान किसानों की शिकायतों और मांगों पर चर्चा की गई। सरकार का मानना है कि इन समस्याओं का स्थायी समाधान निकालने के लिए सभी संबंधित पक्षों को साथ लेकर काम करना जरूरी है। इसी उद्देश्य से संयुक्त समिति गठित करने का निर्णय लिया गया है।
प्रस्तावित समिति किसानों की समस्याओं का अध्ययन करेगी और उन्हें दूर करने के लिए सुझाव देगी। प्रल्हाद जोशी ने कहा कि इन मुद्दों का समाधान केवल एक मंत्रालय के स्तर पर करना आसान नहीं है। इसके लिए विभिन्न विभागों और राज्य सरकारों के बीच समन्वय आवश्यक होगा।
गन्ने की कीमत और तौल में कटौती का मुद्दा उठा
बैठक में गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP), न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) निर्धारित करने की मांग और चीनी मिलों में गन्ने की तौल से जुड़ी शिकायतों पर विशेष रूप से चर्चा हुई।
किसानों की ओर से आरोप लगाया गया कि चीनी मिलों तक गन्ना पहुंचने के बाद वजन में कटौती या परिवहन के दौरान होने वाले नुकसान का हवाला देकर भुगतान योग्य मात्रा कम दर्ज की जा सकती है। कुछ शिकायतों में करीब 9 प्रतिशत तक वजन की कटौती या नुकसान का मुद्दा भी सामने आया।
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इसके अलावा गन्ने में चीनी की मात्रा का आकलन करने की प्रक्रिया और तौल में कथित अनियमितताओं को लेकर भी चिंता जताई गई। किसानों का कहना है कि ऐसी समस्याओं से उनकी मेहनत और उत्पादन लागत के मुकाबले मिलने वाली आमदनी प्रभावित होती है।
प्रल्हाद जोशी के अनुसार, राज्य सरकारों को तौल में गड़बड़ी जैसी अनियमितताओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने की सलाह दी गई है। बैठक में व्यावसायिक उपयोग के लिए चीनी की अलग कीमत निर्धारित करने की मांग पर भी विचार किया गया।
FRP और MSP को लेकर क्या है किसानों की मांग?
गन्ने की कीमत तय करने के मुद्दे पर किसानों की मांग है कि उन्हें अपनी फसल का उचित मूल्य मिले और उत्पादन लागत के हिसाब से उनकी आय सुरक्षित रहे।
FRP यानी उचित एवं लाभकारी मूल्य वह न्यूनतम कीमत है, जिसे केंद्र सरकार गन्ने के लिए निर्धारित करती है। वहीं, MSP यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर किसानों की मांग है कि गन्ने के लिए भी ऐसी व्यवस्था पर विचार किया जाए, जिससे उन्हें उचित कीमत मिलने की गारंटी मजबूत हो सके।
गन्ने की कीमतों से जुड़े इन मुद्दों पर सरकार और किसान संगठनों के बीच चर्चा आगे बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, समिति की पहल के बाद कीमतों में किसी बदलाव या नई व्यवस्था को लागू करने के बारे में अंतिम निर्णय की जानकारी अलग से सामने आना जरूरी होगा।
कर्नाटक के गन्ना किसानों ने भी उठाई SAP की मांग
बैठक में कर्नाटक के गन्ना किसानों के लिए राज्य निर्धारित मूल्य (SAP) लागू करने की मांग भी उठाई गई। SAP वह कीमत है, जिसे राज्य सरकार गन्ने के लिए निर्धारित करती है। यह केंद्र सरकार की ओर से तय FRP से अलग होती है।
कर्नाटक के किसानों का मुद्दा इससे पहले भी उठ चुका है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने दिल्ली में केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी से मुलाकात कर वर्ष 2026-27 के चीनी सीजन के लिए गन्ने की कीमत और किसानों की समस्याओं पर चर्चा की थी।
इस दौरान गन्ने की तौल में कथित कमी, तराजू से छेड़छाड़ और परिवहन के दौरान होने वाली अनियमितताओं की शिकायतें सामने रखी गईं। मुख्यमंत्री ने किसानों से सड़क जाम कर आंदोलन करने के बजाय धैर्य बनाए रखने की अपील भी की थी।
गन्ना किसानों को अब क्या उम्मीद?
संयुक्त समिति बनाने की पहल से गन्ना किसानों की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं पर विस्तार से विचार होने की संभावना है। समिति के सुझावों के आधार पर तौल प्रक्रिया में पारदर्शिता, भुगतान से जुड़ी शिकायतों और उचित मूल्य जैसे मुद्दों पर आगे कदम उठाए जा सकते हैं।
हालांकि, किसानों को वास्तविक राहत कब और किस रूप में मिलेगी, यह समिति की सिफारिशों तथा सरकार के आगामी फैसलों पर निर्भर करेगा। फिलहाल, गन्ने की कीमत, तौल में कथित गड़बड़ी और किसानों की आय से जुड़े मुद्दे चर्चा के केंद्र में हैं।

