बंजर जमीन को उपजाऊ बनाने के लिए अपनाएं ये 5 आसान तरीके। जानें ढैंचा, सनई, जैविक खाद, मिट्टी की जांच और जल निकासी से जमीन की उर्वरता बढ़ाने के उपाय।
बंजर जमीन को उपजाऊ बनाने के उपाय: देश में कई किसान ऐसे हैं, जिनकी जमीन मिट्टी की खराब गुणवत्ता के कारण अच्छी पैदावार नहीं दे पाती। कहीं मिट्टी में नमक की मात्रा अधिक होती है, तो कहीं जरूरी पोषक तत्वों की कमी फसलों की बढ़वार को प्रभावित करती है। ऐसी स्थिति में किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। हालांकि, मिट्टी की सही जांच और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर जमीन की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है।
किसान हरी खाद वाली फसलों, जैविक खाद और उचित जल प्रबंधन की मदद से मिट्टी की सेहत बेहतर बना सकते हैं। आइए जानते हैं बंजर या कमजोर जमीन को खेती के लायक बनाने के पांच उपयोगी तरीके।
1. मिट्टी की जांच से करें शुरुआत
खेत की मिट्टी खराब होने पर सबसे पहले उसकी जांच कराना जरूरी है। इससे पता चलता है कि जमीन में किन पोषक तत्वों की कमी है और मिट्टी में लवणता या क्षारीयता जैसी समस्या तो नहीं है।
मिट्टी में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटैशियम, जिंक और आयरन जैसे पोषक तत्वों की कमी होने से फसलों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है। जांच रिपोर्ट के आधार पर किसान जरूरत के अनुसार खाद और उर्वरकों का इस्तेमाल कर सकते हैं।
मिट्टी की जांच से अनावश्यक खाद डालने पर होने वाला खर्च कम करने और फसल के लिए उचित पोषण प्रबंधन तैयार करने में मदद मिलती है।
2. नमक वाली जमीन को सुधारने के लिए अपनाएं सही तरीका
कुछ खेतों में मिट्टी के अंदर घुलनशील लवणों की मात्रा बढ़ जाती है। इससे पौधों की जड़ों को पानी और पोषक तत्व ग्रहण करने में परेशानी हो सकती है। नतीजतन, फसल की बढ़वार और उत्पादन पर असर पड़ता है।
ऐसी जमीन को सुधारने के लिए पहले मिट्टी और सिंचाई के पानी की जांच करानी चाहिए। इसके बाद खेत की स्थिति के अनुसार जल निकासी की व्यवस्था करना जरूरी है। जहां परिस्थितियां अनुकूल हों, वहां उचित मात्रा में साफ पानी से लवणों को जड़ों के क्षेत्र से नीचे पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
यदि मिट्टी में सोडियम की अधिकता है, तो जांच के आधार पर जिप्सम जैसे सुधारक पदार्थों का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, इसकी मात्रा मिट्टी की स्थिति के अनुसार तय होनी चाहिए।
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3. ढैंचा की खेती से बढ़ाएं मिट्टी की ताकत
ढैंचा एक उपयोगी हरी खाद वाली फसल है। इसे खेत में उगाकर उचित अवस्था में मिट्टी में मिला दिया जाता है। पौधों के सड़ने-गलने से मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ते हैं और उसकी संरचना में सुधार हो सकता है।
ढैंचा की खेती करने के लिए किसान खाली खेत में स्थानीय मौसम के अनुसार इसकी बुवाई कर सकते हैं। पौधों की पर्याप्त बढ़वार होने पर, आमतौर पर फूल आने से पहले, फसल को मिट्टी में मिला दिया जाता है।
ढैंचा की जड़ों में मौजूद सहजीवी जीवाणु वायुमंडलीय नाइट्रोजन को मिट्टी में उपलब्ध कराने में मदद करते हैं। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और अगली फसल के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने में सहायता मिल सकती है।
4. सनई की फसल से भी सुधारें जमीन की गुणवत्ता
सनई का इस्तेमाल भी हरी खाद तैयार करने के लिए किया जाता है। यह फसल तेजी से बढ़ती है और इसके पौधों को उचित समय पर मिट्टी में मिलाने से जैविक पदार्थ बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
सनई की खेती करते समय किसानों को अपने क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी की स्थिति का ध्यान रखना चाहिए। फसल की उचित बढ़वार के बाद इसे मिट्टी में मिला देना चाहिए, ताकि पौधों के गलने-सड़ने से मिट्टी को लाभ मिल सके।
ढैंचा और सनई जैसी फसलों को फसल चक्र में शामिल करने से मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। इनमें से किसी एक फसल का चुनाव स्थानीय कृषि परिस्थितियों के अनुसार किया जा सकता है।
5. फसल अवशेष जलाने के बजाय बनाएं जैविक खाद
फसल कटाई के बाद खेत में बचे डंठल, पत्तियां और दूसरे अवशेषों को जलाने के बजाय उनका उपयोग खाद बनाने में किया जा सकता है। इससे जैविक पदार्थों की बर्बादी कम होती है और मिट्टी की सेहत सुधारने में मदद मिलती है।
किसान फसल के उपयुक्त अवशेषों को खेत में मिलाकर या उनसे कंपोस्ट तैयार करके इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा, सड़ी हुई गोबर की खाद का उचित मात्रा में उपयोग भी मिट्टी की संरचना सुधारने में सहायक हो सकता है।
हालांकि, रोगग्रस्त पौधों के अवशेषों का प्रबंधन सावधानी से करना चाहिए, ताकि कीट और बीमारियां अगली फसल तक न पहुंचें।
बंजर जमीन में खेती शुरू करने से पहले ध्यान रखें ये बातें
कमजोर मिट्टी को दोबारा उपजाऊ बनाने के लिए केवल खाद डालना पर्याप्त नहीं है। किसानों को जमीन की वास्तविक स्थिति के अनुसार योजना बनानी चाहिए।
- खेत की मिट्टी की नियमित जांच कराएं।
- मिट्टी की जरूरत के अनुसार खाद और उर्वरकों का इस्तेमाल करें।
- हरी खाद वाली फसलों को खेती की योजना में शामिल करें।
- खेत में पानी जमा होने से रोकने के लिए उचित जल निकासी रखें।
- फसल अवशेषों का उपयोग जैविक खाद बनाने में करें।
- मिट्टी सुधारने के लिए कृषि विशेषज्ञ की सलाह लें।

