हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के संस्कृत प्रकोष्ठ ने शिवरात्रि पर शिव स्तुति गायन व व्याख्यान आयोजित किया, 25 छात्रों ने लिया भाग, चन्दन भारद्वाज रहे विजेता।
शिवरात्रि के पावन अवसर पर हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, पंचकूला के संस्कृत प्रकोष्ठ की ओर से शिव स्तुति गायन प्रतियोगिता एवं व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस सांस्कृतिक और आध्यात्मिक कार्यक्रम में पंचकूला तथा आसपास के गुरुकुलों और संस्कृत संस्थाओं के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतियोगिता में करीब 25 छात्रों ने शिव स्तुति का सस्वर गायन कर पूरे अकादमी परिसर को भक्तिमय और रसमय वातावरण से भर दिया।
प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए चन्दन भारद्वाज (श्री सनातन धर्म संस्कृत महाविद्यालय, सेक्टर-23 बी, चंडीगढ़) को प्रथम पुरस्कार, गीतांश (आर.के.एस.डी. कॉलेज, कैथल) को द्वितीय पुरस्कार और पुष्कर (श्री सनातन धर्म संस्कृत महाविद्यालय, सेक्टर-23 बी, चंडीगढ़) को तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके अलावा, चंडीगढ़ से राहुल चमोली और हिमांशु शर्मा तथा मनसा देवी गुरुकुल से प्रियांशु अवस्थी और रुद्रांश ठाकुर को प्रोत्साहन पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
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इस अवसर पर अकादमी के कार्यकारी उपाध्यक्ष प्रो. कुलदीप चन्द अग्निहोत्री, सदस्य सचिव श्री मनजीत सिंह, उर्दू प्रकोष्ठ के निदेशक डॉ. चन्द्रत्रिखा तथा हिंदी एवं हरियाणवी प्रकोष्ठ के निदेशक डॉ. धर्मदेव विद्यार्थी भी उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने छात्रों के प्रयासों की सराहना करते हुए संस्कृत और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण पर जोर दिया।
कार्यक्रम के दौरान मुख्य वक्ताओं के रूप में डॉ. कामदेव झा, डॉ. आशुतोष अंगिरस और डॉ. विनय सिंघल ने शिव स्तुति और शिव-शक्ति के दार्शनिक महत्व पर अपने विचार प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने सरल और रोचक शैली में बताया कि शिव भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन में संतुलन, संयम और सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत भी है।
पूरे आयोजन ने यह संदेश दिया कि युवा पीढ़ी में संस्कृत और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति रुचि लगातार बढ़ रही है और ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को अपनी परंपरा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


