TRAI 2026 में AI आधारित सिस्टम से संदिग्ध नंबरों पर सीधी कार्रवाई का प्रस्ताव ला सकता है, जिस पर Jio, Airtel और Vi ने जोखिम और उपभोक्ता अधिकारों को लेकर चिंता जताई है।
देश में बढ़ती स्पैम कॉल और फर्जी मैसेज की समस्या से निपटने के लिए Telecom Regulatory Authority of India यानी TRAI नए और सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। 2026 के लिए प्रस्तावित नियमों के तहत रेगुलेटर एक ऐसा सिस्टम लागू करने पर विचार कर रहा है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से संदिग्ध नंबरों पर सीधे कार्रवाई की जा सके।
अब तक किसी मोबाइल नंबर पर कार्रवाई आमतौर पर तब होती थी, जब उसके खिलाफ शिकायत दर्ज की जाती थी। लेकिन नए ढांचे में बदलाव यह होगा कि अगर टेलीकॉम कंपनियों के AI सिस्टम किसी नंबर को संदिग्ध गतिविधियों में शामिल मान लेते हैं, तो बिना औपचारिक शिकायत के भी उसे ब्लॉक या डिस्कनेक्ट किया जा सकता है। यानी फैसला इंसानी जांच के बजाय एल्गोरिदम के संकेत पर आधारित होगा। TRAI का मानना है कि इससे स्पैम कॉल करने वालों पर तुरंत लगाम लगेगी और आम यूजर्स को राहत मिलेगी।
हालांकि इस प्रस्ताव ने देश की बड़ी टेलीकॉम कंपनियों रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया की चिंता बढ़ा दी है। कंपनियों का कहना है कि केवल AI के अनुमान के आधार पर किसी नंबर को बंद करना जोखिम भरा हो सकता है। कई बार जरूरी कॉल, जैसे बैंक वेरिफिकेशन, कूरियर डिलीवरी या सर्विस से जुड़े फोन भी सिस्टम को संदिग्ध लग सकते हैं।
टेलीकॉम कंपनियों के मुताबिक अगर किसी आम ग्राहक का नंबर गलती से ब्लॉक हो गया, तो उसे दोबारा चालू कराने की प्रक्रिया मुश्किल हो सकती है। इसके अलावा, बिना ठोस शिकायत के सेवा रोकना उपभोक्ता अधिकारों से जुड़ा मुद्दा भी बन सकता है, जिस पर साफ नियम और पारदर्शी प्रक्रिया जरूरी होगी।
also read :Google Chrome में गंभीर सुरक्षा खामी, CERT-In ने जारी की हाई रिस्क चेतावनी, यूजर्स तुरंत करें अपडेट
आंकड़ों के अनुसार, कंपनियां पहले से ही AI आधारित फिल्टरिंग सिस्टम का इस्तेमाल कर रही हैं और रोजाना करोड़ों स्पैम कॉल और मैसेज को ब्लॉक या चिन्हित किया जा रहा है। इसके बावजूद ठग और स्पैमर नए-नए तरीके निकाल लेते हैं, जिससे समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो पा रही है। यही वजह है कि रेगुलेटर अब और सख्त कदमों पर विचार कर रहा है।
अगर यह नया नियम लागू होता है, तो उन लोगों को खास तौर पर सतर्क रहना होगा जो अपने निजी नंबर से बिजनेस या प्रमोशनल कॉल करते हैं। कॉलिंग पैटर्न अगर असामान्य दिखा, तो सिस्टम उसे स्पैम मान सकता है और नंबर अस्थायी या स्थायी रूप से बंद होने की आशंका बन सकती है।
स्पैम से राहत देने की मंशा को सही माना जा रहा है, लेकिन AI आधारित फैसलों की सटीकता, पारदर्शिता और अपील की प्रक्रिया को लेकर बहस अभी जारी है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि TRAI अंतिम नियम किस रूप में लागू करता है और यूजर्स की सुरक्षा व अधिकारों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाता है।


