हरियाणा के शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा ने कैथल में महाराजा सूरजमल जयंती समारोह में कहा कि समाज की मजबूती बुजुर्गों के अनुभव और संस्कारों से संभव है। कार्यक्रम में 151 बुजुर्गों को सम्मानित किया गया।
हरियाणा के शिक्षा मंत्री श्री महीपाल ढांडा ने कहा है कि समाज की असली मजबूती बुजुर्गों के अनुभव, संस्कार और आशीर्वाद से ही संभव होती है। उन्होंने यह बात कैथल में जाट समाज के महान योद्धा और दूरदर्शी शासक महाराजा सूरजमल जाट की जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कही।
अपने संबोधन में शिक्षा मंत्री ने कहा कि जो समाज अपने बुजुर्गों को सम्मान देता है, वही समाज प्रगति की राह पर आगे बढ़ता है। उन्होंने महाराजा सूरजमल के आदर्शों को आज के समय में भी उतना ही प्रासंगिक बताते हुए कहा कि उनके बताए मार्ग पर चलकर समाज शिक्षा, संगठन और सेवा के क्षेत्रों में नई ऊंचाइयों को छू सकता है।
कार्यक्रम का आयोजन “हमारे बुजुर्ग हमारी विरासत, हमारी धरोहर” थीम पर किया गया, जिसमें समाज के बुजुर्गों, युवाओं, शिक्षाविदों और गणमान्य नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर सभी ने समाज की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने और आपसी एकता को मजबूत करने का संकल्प लिया।
मंत्री महीपाल ढांडा ने संयुक्त परिवार व्यवस्था को भारतीय संस्कृति की बड़ी शक्ति बताते हुए नई पीढ़ी से अपील की कि वे अपने बुजुर्गों का सम्मान करें और उनके अनुभवों से सीख लेकर जीवन में आगे बढ़ें। उन्होंने आयोजन समिति के प्रयासों की सराहना करते हुए समाज हित में 11 लाख रुपये की सहयोग राशि देने की घोषणा भी की।
कार्यक्रम में विशेष रूप से संस्था द्वारा 151 बुजुर्गों को शॉल, चादर और सम्मान चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। इस सम्मान समारोह ने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया और समाज में बुजुर्गों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का संदेश दिया।
कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने कहा कि महाराजा सूरजमल जैसे महापुरुषों की जयंती केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने और समाज को एकता, संस्कार और सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ाने की प्रेरणा भी है।


