39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेले का भव्य समापन हुआ। हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम घोष ने तेलंगाना, ओडिशा, यूपी, राजस्थान, मेघालय समेत कई राज्यों और विदेशी कलाकारों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया।
शिल्प और परंपरा की अनुपम छटा बिखेरने के बाद 39वां सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला रविवार को भव्य समापन समारोह के साथ संपन्न हो गया। इस अवसर पर हरियाणा के माननीय राज्यपाल प्रोफेसर असीम कुमार घोष ने देश-विदेश से आए शिल्पकारों और बुनकरों को उनकी उत्कृष्ट कारीगरी के लिए पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया, जिससे सम्मान पाने वाले कलाकारों के चेहरे खुशी से खिल उठे।
समापन समारोह में राज्यपाल की गरिमामयी उपस्थिति के साथ हरियाणा के कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल, नगर निगम मेयर प्रवीण जोशी भी मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा ने की। इस अवसर पर उन कलाकारों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने अपनी बेहतरीन कला से मेले को खास बना दिया।
परंपरागत श्रेणी में तेलंगाना के शिल्पकार गड्डम बाला को इकट शिल्प में उत्कृष्ट योगदान के लिए चुना गया और उन्हें 11,000 रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई।
कला रत्न श्रेणी में ओडिशा के प्रसिद्ध शिल्पकार दामोदर फतेह सिंह को पट्टचित्र कला के लिए सम्मानित किया गया, साथ ही उन्हें भी 11,000 रुपये की राशि दी गई।
कला मणि श्रेणी के अंतर्गत कुल आठ शिल्पकारों को सम्मान मिला। इनमें उत्तर प्रदेश के सलाउद्दीन (चिकनकारी), आंध्र प्रदेश के करुपथि राजावरी कुमार (कलमकारी), उत्तर प्रदेश के इरफान अली (मार्बल इनले), राजस्थान के लक्ष्मी लाल कुम्हार (मोलेला कला), हिमाचल प्रदेश के ओम प्रकाश मल्होत्रा (कुल्लू शॉल), बिहार की उर्मिला देवी (मधुबनी पेंटिंग), आंध्र प्रदेश की शकुंतला (लकड़ी की नक्काशी) और उत्तर प्रदेश के मोहम्मद कलीम (बनारसी साड़ी शिल्प) शामिल हैं। सभी को 11,000 रुपये की पुरस्कार राशि दी गई।
कला निधि श्रेणी में मेघालय के एह्मोनखोंगविर (केन-बांस शिल्प), मेघालय के रेलिवेंट (एरी सिल्क), तेलंगाना के के. रामू (कलमकारी), आंध्र प्रदेश के संतोष कुमार (लकड़ी के खिलौने), राजस्थान की चंदा देवी (लेदर फुटवियर) और पश्चिम बंगाल के असित बरन जाना (मदुरकाठी शिल्प) को चुना गया। सभी को 5,100 रुपये की राशि प्रदान की गई।
कला श्री श्रेणी में उत्तर प्रदेश की शिप्रा शर्मा (लिप्पन आर्ट), पश्चिम बंगाल की रीता सरकार (जूट शिल्प) और दिल्ली की चारु अरोड़ा (ओरिगामी/पेपर क्राफ्ट) को सम्मानित किया गया, जिन्हें 2,100 रुपये की पुरस्कार राशि दी गई।
इसके अलावा सर्वश्रेष्ठ विदेशी पुरस्कार श्रेणी में मिस्र की गीहान खलीफा (कढ़ाई कला), श्रीलंका की इरेशा (बाटिक शिल्प), अल्जीरिया के होसिन नेज्जार (हैंड वीविंग) और मिस्र के एम.डी. एमपैपी (धातु/पीतल प्लेट एवं लैम्प शिल्प) को चुना गया।
समापन समारोह में वक्ताओं ने कहा कि सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला न केवल भारतीय बल्कि वैश्विक हस्तशिल्प परंपराओं को मंच प्रदान करता है और कारीगरों को पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस वर्ष भी मेले ने कला, संस्कृति और परंपरा के संगम के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई और हजारों दर्शकों को भारतीय व विदेशी शिल्प की विविधता से रूबरू कराया।


