फरीदाबाद के सूरजकुंड में हरियाणा–अफ्रीका रणनीतिक बैठक में 21 अफ्रीकी देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कृषि, MSME, स्टार्टअप और तकनीक में सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया और हरियाणा के विदेश सहयोग विभाग की भूमिका रेखांकित की।
हरियाणा और अफ्रीकी देशों के बीच आर्थिक, औद्योगिक और तकनीकी सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से फरीदाबाद के सूरजकुंड में एक अहम हरियाणा–अफ्रीका रणनीतिक साझेदारी बैठक आयोजित की गई। इस उच्चस्तरीय बैठक में 21 अफ्रीकी देशों के राजदूतों और उच्चायुक्तों के साथ उद्योग जगत और नीति निर्माण से जुड़े प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि सूरजकुंड की सांस्कृतिक विरासत से भारत–अफ्रीका सहयोग के एक नए चरण की शुरुआत हो रही है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के रिश्ते समानता, आपसी सम्मान और साझा विकास के सिद्धांतों पर आधारित हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि हरियाणा देश का पहला राज्य है, जिसने अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए अलग से विदेश सहयोग विभाग स्थापित किया है, जिससे वैश्विक साझेदारियों को संस्थागत रूप दिया जा सके।
उन्होंने हरियाणा की औद्योगिक क्षमता का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य कृषि, विनिर्माण, MSME, फूड प्रोसेसिंग, ऑटोमोबाइल कंपोनेंट्स और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। NCR से जुड़ाव और मजबूत लॉजिस्टिक नेटवर्क के कारण अफ्रीकी देशों के साथ बहु-क्षेत्रीय सहयोग की व्यापक संभावनाएं बनती हैं। मुख्यमंत्री ने अफ्रीकी देशों को कृषि तकनीक, सिंचाई प्रबंधन, उन्नत बीज, डेयरी और पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन में साझेदारी के लिए आमंत्रित किया।
उन्होंने केन्या, तंजानिया, युगांडा, इथियोपिया और रवांडा जैसे देशों के साथ संयुक्त खेती, प्रशिक्षण कार्यक्रम और तकनीकी सहयोग की संभावनाओं पर भी जोर दिया। साथ ही, नवीकरणीय ऊर्जा, जल संरक्षण और हरित विकास को साझा जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि सौर ऊर्जा और जल प्रबंधन में संयुक्त प्रयास भविष्य की पीढ़ियों के लिए जरूरी हैं।
उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरवीर सिंह ने कहा कि भारत–अफ्रीका द्विपक्षीय व्यापार अब 90 से 100 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंच चुका है, जो दोनों क्षेत्रों के बीच मजबूत आर्थिक संबंधों का संकेत है। उन्होंने बताया कि हरियाणा से अफ्रीका को ऑटो कंपोनेंट्स, ट्रैक्टर व कृषि मशीनरी, फार्मा और इंजीनियरिंग उत्पादों का निर्यात होता है, जबकि अफ्रीका से खनिज और कुछ कृषि कच्चा माल आयात किया जाता है। उन्होंने कौशल विकास और वर्कफोर्स मोबिलिटी को भी सहयोग का अहम क्षेत्र बताया।
बैठक में विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और कई अफ्रीकी देशों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। हरियाणा सरकार के शीर्ष अधिकारियों ने भी निवेश, व्यापार और तकनीकी साझेदारी को आगे बढ़ाने पर विचार साझा किए।
कुल मिलाकर, यह बैठक केवल कूटनीतिक संवाद तक सीमित नहीं रही, बल्कि व्यापार, निवेश, तकनीक, कृषि और स्टार्टअप के जरिए भारत–अफ्रीका सहयोग को नई दिशा देने की ठोस पहल के रूप में देखी जा रही है।


