हरियाणा सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन और वित्तीय सहायता योजनाओं की राशि बढ़ा दी है। नई दरें 1 नवंबर 2025 से लागू होंगी और फरवरी 2026 में भुगतान होगा। बुजुर्गों, महिलाओं, दिव्यांगों और जरूरतमंदों को मिलेगा बड़ा लाभ।
हरियाणा सरकार ने सामाजिक सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए पेंशन, भत्तों और वित्तीय सहायता योजनाओं की दरों में बढ़ोतरी के निर्देश जारी कर दिए हैं। सामाजिक न्याय, अधिकारिता, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण तथा अंत्योदय (सेवा) विभाग की ओर से जारी आदेशों के अनुसार, यह बढ़ी हुई दरें 1 नवंबर 2025 से प्रभावी मानी जाएंगी और इनका भुगतान फरवरी 2026 में लाभार्थियों को किया जाएगा।
सरकारी आदेशों के मुताबिक, लाडली सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना, दिव्यांगजन पेंशन (बौने व्यक्तियों सहित), निराश्रित महिलाओं व विधवाओं को वित्तीय सहायता, विधुर एवं अविवाहित व्यक्तियों के लिए वित्तीय सहायता योजना-2023, वृद्धावस्था सम्मान भत्ता योजना, दुर्लभ रोगों से पीड़ित व्यक्तियों को सहायता, स्टेज-III व स्टेज-IV कैंसर रोगियों को सहायता तथा किन्नर पेंशन योजना के तहत अब लाभार्थियों को ₹3,200 प्रतिमाह पेंशन या सहायता राशि प्रदान की जाएगी।
एसिड पीड़ितों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता में भी महत्वपूर्ण बढ़ोतरी की गई है। अब दिव्यांगता प्रतिशत के आधार पर सहायता तय की जाएगी। इसके तहत 40 से 50 प्रतिशत दिव्यांगता पर ₹8,000, 50 से 60 प्रतिशत पर ₹11,200 और 60 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता पर ₹14,400 प्रतिमाह की सहायता दी जाएगी, जिसमें ₹3,200 को आधार राशि माना गया है।
सरकार ने स्कूल न जाने वाले विभिन्न अक्षमताओं वाले बच्चों को दी जाने वाली सहायता राशि भी बढ़ा दी है। अब यह राशि ₹2,400 से बढ़ाकर ₹2,600 प्रतिमाह कर दी गई है। वहीं निराश्रित बच्चों के लिए सहायता में भी वृद्धि की गई है, जिसके तहत एक बच्चे पर ₹2,300 प्रतिमाह और दो बच्चों पर ₹4,600 प्रतिमाह की वित्तीय सहायता दी जाएगी।
इसके अलावा, हरियाणा में बसे कश्मीरी प्रवासी परिवारों को मिलने वाली सहायता राशि में भी इजाफा किया गया है। अब एक व्यक्ति को ₹1,700 प्रतिमाह और एक परिवार को अधिकतम ₹8,500 प्रतिमाह की सहायता प्रदान की जाएगी।
राज्य सरकार का कहना है कि यह फैसला समाज के बुजुर्गों, महिलाओं, दिव्यांगजनों, गंभीर रोगियों और जरूरतमंद वर्गों को आर्थिक रूप से मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है। इससे न केवल उनकी दैनिक जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी, बल्कि उन्हें सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन जीने का सहारा भी मिलेगा।


