एनएबीएल मान्यता से प्रयोगशालाओं में परीक्षण परिणामों की सटीकता और विश्वसनीयता बढ़ती है। पंचकूला में क्यूएए की संगोष्ठी में राजीव अरोड़ा ने गुणवत्ता प्रबंधन और तकनीकी विश्वसनीयता पर जोर दिया।
क्वालिटी एश्योरेंस अथॉरिटी (क्यूएए) के चेयरपर्सन श्री राजीव अरोड़ा ने कहा कि वर्तमान तकनीकी और नियामकीय परिवेश में एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाएं अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने बताया कि एनएबीएल (राष्ट्रीय परीक्षण एवं अंशांकन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड) की मान्यता प्रयोगशालाओं की तकनीकी दक्षता, निष्पक्षता और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कार्यप्रणाली की औपचारिक पुष्टि करती है, जिससे परीक्षण परिणामों की विश्वसनीयता और सटीकता सुनिश्चित होती है।
क्यूएए, हरियाणा द्वारा एनएबीएल के सहयोग से पंचकूला में एक दिवसीय संगोष्ठी एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम 3 दिसंबर 2025 को हरियाणा के माननीय मुख्यमंत्री की उपस्थिति में क्यूएए और एनएबीएल के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) का परिणाम है। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री राजीव अरोड़ा ने की, जिसमें राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ और प्रयोगशाला प्रतिनिधि शामिल हुए।
गुणवत्ता प्रबंधन में मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं की अहम भूमिका
श्री राजीव अरोड़ा ने अपने संबोधन में कहा कि मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाएं अंशांकन की शुद्धता, मापन अनिश्चितता के नियंत्रण, विधि सत्यापन, उपकरणों के नियमित परीक्षण, आंतरिक गुणवत्ता नियंत्रण और गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली के प्रभावी संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इससे परीक्षण में होने वाली त्रुटियों में कमी आती है, रिपोर्टों की विश्वसनीयता बढ़ती है और सार्वजनिक अवसंरचना परियोजनाओं में तकनीकी रूप से सुदृढ़ और भरोसेमंद निर्णय लेना संभव हो पाता है।
उन्होंने कहा कि सटीक और प्रमाणित परीक्षण प्रणाली न केवल परियोजनाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करती है, बल्कि समय और लागत की बचत में भी सहायक होती है।
हरियाणा में एनएबीएल प्लस श्रेणी की प्रयोगशालाओं के विकास पर जोर
चेयरपर्सन ने बताया कि क्यूएए, एनएबीएल के सहयोग से हरियाणा में एनएबीएल प्लस श्रेणी की प्रयोगशालाओं के विकास को बढ़ावा देगा, ताकि राज्य में गुणवत्ता आश्वासन तंत्र और अधिक सुदृढ़ हो सके। उन्होंने कहा कि सड़क और भवन निर्माण, पुल, जलापूर्ति, सीवरेज, विद्युत ढांचा, कृषि परीक्षण, चिकित्सा सेवाएं और पर्यावरण निगरानी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं का मजबूत नेटवर्क विकसित करना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सीमेंट, स्टील, कंक्रीट, मिट्टी, बिटुमेन, जल गुणवत्ता, अपशिष्ट जल, विद्युत उपकरण और वायु गुणवत्ता जैसे मानकों का सटीक परीक्षण सार्वजनिक अवसंरचना की सुरक्षा और दीर्घकालिक टिकाऊपन के लिए अत्यंत आवश्यक है। एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाएं परीक्षण प्रक्रियाओं का तकनीकी प्रमाणीकरण सुनिश्चित कर परियोजना में देरी, लागत वृद्धि और गुणवत्ता संबंधी विवादों के जोखिम को कम करती हैं।
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एनएबीएल मान्यता प्रक्रिया पर विशेषज्ञों की तकनीकी प्रस्तुति
कार्यक्रम के दौरान एनएबीएल अधिकारियों ने तकनीकी प्रस्तुति के माध्यम से मान्यता की प्रक्रिया, पात्रता मानदंड, दस्तावेजीकरण आवश्यकताएं, गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली, मापन अनिश्चितता, अंतर-प्रयोगशाला तुलना और दक्षता परीक्षण (प्रोफिशिएंसी टेस्टिंग) से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि एनएबीएल मान्यता चार वर्ष के लिए प्रदान की जाती है, जिसके दौरान वार्षिक निगरानी ऑडिट, दो वर्ष बाद पुनर्मूल्यांकन और अवधि पूरी होने पर पुनः प्रत्यायन की प्रक्रिया होती है। साथ ही यह भी जानकारी दी गई कि एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं की परीक्षण एवं अंशांकन रिपोर्टें अंतरराष्ट्रीय पारस्परिक मान्यता व्यवस्थाओं के तहत 80 से अधिक देशों में स्वीकार की जाती हैं।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के लिए संस्थागत तंत्र उपलब्ध है और देशभर में बड़ी संख्या में प्रयोगशालाएं इस प्रणाली के अंतर्गत कार्य कर रही हैं। इस पहल से हरियाणा में गुणवत्ता आधारित तकनीकी ढांचे को और अधिक मजबूत करने में मदद मिलेगी।


