39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव 2026 में देश-विदेश के पर्यटक बहुसांस्कृतिक कला, हस्तशिल्प, लोक नृत्य और पारंपरिक परिधानों का आनंद ले रहे हैं। उत्तर प्रदेश, हरियाणा और गुजरात के स्टॉल बने खास आकर्षण।
39वां सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव-2026 इन दिनों कला, संस्कृति और परंपरा के भव्य संगम के रूप में उभर रहा है। देश-विदेश से आए पर्यटक मेले की बहुसांस्कृतिक छटा और जीवंत माहौल का भरपूर आनंद उठा रहे हैं। मेला परिसर में उत्साह, जिज्ञासा और खुशी का माहौल साफ नजर आ रहा है, जिसे कैंडिड फोटोग्राफी के माध्यम से भी खूबसूरती से कैद किया जा रहा है।
इस महोत्सव में विभिन्न राज्यों और देशों की पारंपरिक कलाएं, हस्तशिल्प, लोक संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। कहीं मिट्टी, लकड़ी, धातु और कपड़े से बनी कलाकृतियां लोगों को लुभा रही हैं, तो कहीं कलाकार अपनी जीवंत प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह रहे हैं।
उत्तर प्रदेश की हस्तनिर्मित रेडीमेड ड्रेस बनी महिलाओं की पहली पसंद
इस वर्ष थीम स्टेट उत्तर प्रदेश के स्टॉल खास चर्चा में हैं। यहां पारंपरिक शिल्प और आधुनिक फैशन का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। मेले में आए खरीदारों का कहना है कि यहां उपलब्ध रेडीमेड सूट और कुर्तियों में बेहतरीन कपड़ा, शानदार सिलाई, आकर्षक रंग संयोजन और किफायती कीमत का बेहतरीन तालमेल देखने को मिलता है। कई महिलाएं इन्हें रोजमर्रा के पहनावे के साथ-साथ त्योहारों और विशेष अवसरों के लिए भी खरीद रही हैं।
हरियाणवी लोक कलाकारों की बीन-बाजे की धुन ने बांधा समां
मेले में हरियाणवी लोक कलाकार अपनी बीन और बाजे की मधुर धुन और ढोल-नगाड़ों की थाप से पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर रहे हैं। पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकार हरियाणा की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं की शानदार झलक पेश कर रहे हैं। महिलाएं, बच्चे और युवा इन धुनों पर थिरकने से खुद को रोक नहीं पा रहे हैं। रागनियां, घूमर, फाग और अन्य लोक नृत्यों की प्रस्तुतियां मेले की रौनक को और बढ़ा रही हैं।
कलाकारों का कहना है कि सूरजकुंड मेला उन्हें अपनी कला को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का सुनहरा अवसर देता है, वहीं पर्यटक भी भारतीय लोक संस्कृति से रूबरू होकर गर्व महसूस कर रहे हैं।
गरवी गुरजारी परिसर में गुजरात का सिल्क और मिरर वर्क बना आकर्षण
इस वर्ष भी गुजरात के शिल्पकार अपने पारंपरिक सिल्क और मिरर वर्क के साथ विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। गरवी गुरजारी परिसर में सजे रंग-बिरंगे स्टॉल पर्यटकों को अपनी ओर खींच रहे हैं। यहां सूती पोशाक सामग्री, साड़ियां, स्टोल, कुर्ते, घर की सजावट की वस्तुएं और फोल्डेबल चटाइयां बेहतरीन गुणवत्ता और पारंपरिक कारीगरी का शानदार उदाहरण पेश कर रही हैं।
गुजरात से आए शिल्पकारों ने अपने उत्पादों में महीन कढ़ाई, चमकदार शीशों की जड़ाई और जीवंत रंगों का खूबसूरती से इस्तेमाल किया है। यह कला न केवल परंपरा की पहचान है, बल्कि ग्रामीण कारीगरों की आजीविका का भी प्रमुख साधन है। देश-विदेश से आए पर्यटक इन उत्पादों को खास रुचि से खरीद रहे हैं।
कुल मिलाकर, सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव भारतीय संस्कृति, परंपरा और हस्तकला को बढ़ावा देने का एक सशक्त मंच बनकर उभर रहा है, जहां हर रंग, हर स्वाद और हर कला अपनी अलग पहचान के साथ लोगों का दिल जीत रही है।


