हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि पेंशन को लेकर विपक्ष भ्रम फैला रहा है। किसी की पेंशन नहीं काटी गई है। बीजेपी सरकार ने 11 साल में वृद्धावस्था पेंशन 2200 रुपये बढ़ाकर 3200 रुपये कर दी है और हर गरीब तक सीधा लाभ पहुंचाया जा रहा है।
हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने पेंशन को लेकर विपक्ष पर भ्रामक प्रचार करने का आरोप लगाया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि प्रदेश में किसी भी पात्र व्यक्ति की पेंशन नहीं काटी गई है, बल्कि डबल इंजन सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि हर गरीब और जरूरतमंद तक सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचे।
मुख्यमंत्री मंगलवार को हरियाणा निवास में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और इनेलो लगातार यह गलत प्रचार कर रहे हैं कि प्रदेश में दो लाख लोगों की पेंशन काट दी गई है, जबकि सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों का सम्मान करना सरकार की प्राथमिकता है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार मिलकर गरीब और वृद्ध नागरिकों के हित में लगातार काम कर रही है।
देश में सबसे ज्यादा वृद्धावस्था पेंशन हरियाणा में
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हरियाणा देश का वह राज्य है, जहां सबसे अधिक वृद्धावस्था पेंशन दी जा रही है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में हरियाणा में वृद्धावस्था पेंशन 3,200 रुपये प्रतिमाह है, जबकि पंजाब जैसे राज्यों में यह राशि केवल 1,500 रुपये है। उन्होंने आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वहां केवल वादे किए गए, लेकिन उन्हें पूरा नहीं किया गया।
बीजेपी सरकार ने 11 साल में बढ़ाई पेंशन 2200 रुपये
सीएम नायब सिंह सैनी ने कहा कि कांग्रेस और इनेलो के शासनकाल में पेंशन में केवल नाममात्र की बढ़ोतरी हुई थी। इनेलो के पांच साल के कार्यकाल में पेंशन सिर्फ 200 रुपये बढ़ी और कांग्रेस के 10 साल के शासन में केवल 700 रुपये की वृद्धि की गई। जबकि बीजेपी सरकार ने पिछले 11 वर्षों में वृद्धावस्था पेंशन को 1,000 रुपये से बढ़ाकर 3,200 रुपये प्रतिमाह कर दिया है, यानी कुल 2,200 रुपये की ऐतिहासिक बढ़ोतरी की गई है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में 20 लाख 31 हजार 367 बुजुर्ग वृद्धावस्था पेंशन का लाभ ले रहे हैं।
पेंशन काटी नहीं गई, बल्कि नियमों के तहत रोकी गई
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जिन मामलों में पेंशन रोकी गई है, वे नियमों के अनुसार हैं। लगभग 1 लाख से अधिक मामलों में लाभार्थियों की मृत्यु हो चुकी थी, लेकिन तकनीकी कारणों से उनका डेटा समय पर अपडेट नहीं हो पाया। जैसे ही रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया से डेटा मिला, वैसे ही इन मामलों में पेंशन रोकी गई।
इसके अलावा करीब 37 हजार ऐसे मामले सामने आए, जिनमें वास्तविक आयु 60 वर्ष से कम थी और गलत तरीके से पेंशन ली जा रही थी। ऐसे मामलों में जांच के बाद पेंशन स्थगित की गई है। यदि कोई व्यक्ति सही दस्तावेज प्रस्तुत करता है, तो उसकी पेंशन दोबारा शुरू कर दी जाएगी।
आय सीमा बीजेपी सरकार ने नहीं लगाई
मुख्यमंत्री ने कहा कि वृद्धावस्था पेंशन पर आय सीमा लगाने की शुरुआत वर्ष 1992 में कांग्रेस सरकार के समय हुई थी, जब पेंशन केवल 100 रुपये थी और वार्षिक आय सीमा 10 हजार रुपये तय की गई थी। इनेलो और कांग्रेस दोनों सरकारों ने लंबे समय तक इस आय सीमा में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया।
बीजेपी सरकार ने 5 अप्रैल 2023 को आय सीमा को 2 लाख से बढ़ाकर 3 लाख रुपये किया, जिससे लाखों नए बुजुर्ग पेंशन योजना से जुड़े। इसी का परिणाम है कि आज पेंशन लाभार्थियों की संख्या बढ़कर 20 लाख से ज्यादा हो चुकी है।
सरकार की प्राथमिकता: पारदर्शिता और समयबद्ध समाधान
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि हर पात्र व्यक्ति को समय पर पेंशन मिले और किसी के साथ अन्याय न हो। पेंशन से जुड़ी शिकायतों का समयबद्ध समाधान किया जा रहा है और जरूरत पड़ने पर पात्र लोगों की पेंशन फिर से बहाल की जा रही है।


