सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा ने कहा कि सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला विकसित भारत 2047 के संकल्प को साकार करने में अहम भूमिका निभा रहा है और शिल्पकारों को वैश्विक मंच प्रदान कर रहा है।
हरियाणा के सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा ने 39वें अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड शिल्प मेले के अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि यह मेला केवल कला और संस्कृति का उत्सव नहीं है, बल्कि देश के शिल्पकारों, कलाकारों और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान और अवसर प्रदान करने वाला एक सशक्त मंच भी है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर पहुंचाने के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
डॉ. शर्मा ने बताया कि सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला वर्ष 1987 से लगातार आयोजित किया जा रहा है और समय के साथ इसकी प्रतिष्ठा और भव्यता में निरंतर वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में इस मेले की अंतरराष्ट्रीय पहचान और भी मजबूत हुई है। आज यह मेला न केवल भारत बल्कि दुनिया भर के शिल्पकारों और कलाकारों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है।
उन्होंने कहा कि यह मेला शिल्पकारों और कलाकारों के लिए एक बड़ा एक्सपोजर प्लेटफॉर्म है, जहां उन्हें अपनी कला और कारीगरी को वैश्विक दर्शकों के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है। डॉ. शर्मा ने जानकारी दी कि पिछले वर्ष जहां 44 देशों ने इस मेले में भाग लिया था, वहीं इस वर्ष 50 से अधिक देशों की सहभागिता इस आयोजन की बढ़ती वैश्विक लोकप्रियता और विश्वसनीयता को दर्शाती है। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारतीय हस्तशिल्प और लोक कला की मांग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार बढ़ रही है।
सहकारिता मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि विकसित भारत के निर्माण में सूरजकुंड शिल्प मेले का विशेष योगदान रहेगा, क्योंकि यह मेला स्वदेशी कला, संस्कृति और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देता है। उन्होंने कहा कि जब देश के कारीगर और शिल्पकार आत्मनिर्भर बनेंगे, तभी देश की अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक पहचान भी और मजबूत होगी। इस प्रकार के आयोजन न केवल पर्यटन को बढ़ावा देते हैं, बल्कि ग्रामीण और कारीगर वर्ग की आजीविका को भी सशक्त करते हैं।
डॉ. शर्मा ने आम जनता से अपील की कि वे मेले में आए शिल्पकारों और कलाकारों से संवाद करें और उनकी कला को प्रोत्साहन दें। इससे कलाकारों और कारीगरों का मनोबल बढ़ेगा और उन्हें अपने काम को आगे बढ़ाने के लिए नई प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस तरह का सहयोग सीधे तौर पर कारीगरों की आजीविका को मजबूत करने में मदद करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रसिद्ध कलाकार कैलाश खेर जैसे कलाकारों की उपस्थिति से मेले की गरिमा और आकर्षण और बढ़ जाता है। इससे युवाओं और पर्यटकों में भी भारतीय लोक कला और संस्कृति के प्रति रुचि बढ़ती है। कुल मिलाकर, सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला आज भारत की सांस्कृतिक विविधता, कारीगरी और रचनात्मकता का जीवंत प्रतीक बन चुका है और आने वाले वर्षों में इसकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण होगी।


