हरियाणा आज देश में खेलों की मजबूत पहचान बन चुका है। कुश्ती के अखाड़ों से लेकर खेल महाकुंभ और मुख्यमंत्री कप जैसे आयोजनों तक, 50 हजार से अधिक खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं।
हरियाणा आज देश में खेलों की एक सशक्त और प्रेरणादायक पहचान बन चुका है। कुश्ती के पारंपरिक अखाड़ों से लेकर खेल महाकुंभ और मुख्यमंत्री कप जैसे बड़े आयोजनों तक, प्रदेश के 50 हजार से अधिक खिलाड़ी लगातार विभिन्न प्रतियोगिताओं में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। कम जनसंख्या वाला यह राज्य आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पदकों की दौड़ में सबसे आगे दिखाई देता है और खेल जगत में अपनी प्रतिभा, अनुशासन और समर्पण का लोहा मनवा रहा है।
खेल संस्कृति हरियाणा की पहचान का अभिन्न हिस्सा रही है। गांव-गांव में मौजूद अखाड़े, स्थानीय टूर्नामेंट और स्कूल-कॉलेज स्तर की प्रतियोगिताएं युवाओं को बचपन से ही खेलों से जोड़ती हैं। यही वजह है कि प्रदेश के खिलाड़ी कुश्ती, मुक्केबाजी, एथलेटिक्स, शूटिंग, हॉकी, बैडमिंटन और अन्य कई खेलों में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। राष्ट्रीय खेलों, एशियाई खेलों, कॉमनवेल्थ गेम्स और ओलंपिक जैसे बड़े मंचों पर हरियाणा के खिलाड़ियों की मौजूदगी अब आम बात हो गई है।
राज्य सरकार की नीतियों और योजनाओं ने भी इस सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बीते कुछ वर्षों में खेल ढांचे को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश किया गया है। नए स्टेडियम, खेल परिसर, ग्रामीण खेल केंद्र, सिंथेटिक ट्रैक, स्विमिंग पूल और आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएं विकसित की गई हैं। इसके साथ ही खेल नर्सरी और अकादमियों के जरिए छोटे शहरों और गांवों से प्रतिभाओं को खोजकर उन्हें तराशने का काम किया जा रहा है।
खेल महाकुंभ और मुख्यमंत्री कप जैसे बड़े आयोजनों ने प्रदेश के युवाओं को प्रतिस्पर्धा का मंच दिया है। इन आयोजनों के माध्यम से हजारों खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है और उन्हें आगे के बड़े टूर्नामेंट्स के लिए तैयार किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आयोजन जमीनी स्तर पर खेल संस्कृति को मजबूत करते हैं और युवाओं में आत्मविश्वास पैदा करते हैं।
हरियाणा की खास बात यह है कि यहां खेल सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि गांवों में भी बराबरी से लोकप्रिय हैं। ग्रामीण इलाकों से निकलकर कई खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे हैं और उन्होंने देश का नाम रोशन किया है। यह साबित करता है कि अगर सही मार्गदर्शन, संसाधन और अवसर मिलें, तो प्रतिभा किसी भी क्षेत्र से उभर सकती है।
कम जनसंख्या के बावजूद हरियाणा का पदक तालिका में आगे रहना इस बात का संकेत है कि यहां गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। खिलाड़ी सिर्फ जीत के लिए नहीं, बल्कि अनुशासन, मेहनत और खेल भावना के साथ मैदान में उतरते हैं। यही सोच उन्हें लंबे समय तक सफल बनाए रखती है।
खेल विशेषज्ञों का कहना है कि हरियाणा आज देश के लिए एक “स्पोर्ट्स मॉडल” बन चुका है, जहां नीति, ढांचा और जमीनी स्तर की प्रतिभा—तीनों का संतुलित विकास देखने को मिलता है। आने वाले वर्षों में भी उम्मीद है कि हरियाणा के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर और ज्यादा चमकेंगे और देश के लिए गौरव के नए पल लेकर आएंगे।


